Tenaliram short Hindi Story: हीरों का बंटवारा 

तेनालीराम की कहानी

Tenaliram short Hindi Story | राजा के दरबार में पंडित तेनालीरमा कृष्णा नाम का एक कुशल और बुद्धिमान मंत्री था। एक बार दरबार में एक मामला आया कि महाराज के लिए न्याय करना मुश्किल हो गया। इस स्थिति में, तेनालीरमा ने विवेक से काम लिया और राजा की उलझन को हल किया।

ऐसा हुआ कि एक दिन श्यामू नाम का एक व्यक्ति महल में न्याय मांगने आया। राजा ने उससे पूरी बात बताने को कहा जिससे की उसके साथ न्याय किया जा सके। श्यामू ने बताया कि जब वह कल अपने स्वामी के साथ कहीं जा रहा था तो उन्हें रास्ते में एक गठरी मिली जिसमें तीन चमकते हीरे थे।

हीरों का बंटवारा

हीरे को देखकर मैंने कहा कि स्वामी इन हीरों पर राजा का अधिकार है, इसलिए इन्हें राजखजाने में जमा करा देना चाहिए। यह सुनकर, स्वामी आग बबूला हो गए और कहा कि हीरे के बारे में किसी को बताने की आवश्यकता नहीं है। हम इन्हें आधा आधा कर लेंगे। यह सुनकर में भी लालची हो गया और मैं अपने स्वामी के साथ घर को वापस लौट आया।

अपनी हवेली में पहुँचते ही स्वामी ने मुझे हीरे देने से मना कर दिया और अपनी हवेली से भागा दिया। मेरे साथ अन्याय हुआ है महाराज कृपया मेरे साथ न्याय कीजिये।

श्यामू की व्यथा सुनकर, राजा ने तुरंत उसमे मालिक को दरबार में उपस्थित होने का आदेश दिया। श्यामू का स्वामी बहुत दुष्ट व लालची था। जब वह दरबार में आया तो महाराज से बोला कि यह सच है कि हमें हीरे मिले थे, लेकिन मैंने तो सब हीरे श्यामू को राजकोष में जमा करने के लिए दे दिये थे। श्यामू तो बहुत ही लालची आदमी है इसलिए वो आपके पास आ कर झूठ बोल रहा है।

Tenaliram short Hindi Story

महाराज ने कहा कि क्या प्रमाण है कि तुम सच कह रहे हो। श्यामू के मालिक ने कहा कि आप बाकी नौकरों से पूछ सकते हैं, वे सभी वहाँ मौजूद थे। जब राजा ने साथ के तीनों नौकरों से पूछा, तो उन्होंने कहा कि मालिक ने तो हीरों से भरी गठरी श्यामू को दे दी थी, जो अभी श्यामू के पास ही होनी चाहिए।

अब राजा को समझ नहीं आया की कौन सच बोल रहा है और कौन झूठ बोल रहा है। राजा ने बैठक समाप्त करने के आदेश दिये और कहा कि मैंने दोनों पक्षों को सुन लिया है लेकिन हम फैसला कुछ समय बाद सुनाएँगे।

राजा ने अपने सभी मंत्रियों को राजकक्ष में आकार अपनी सलाह देने को कहा। कोई बोला कि श्यामू लालची है वही झूठ बोल रहा है, तो किसी ने कहा कि श्यामू का मालिक झूठा है ओर उसके सभी नौकर उसके साथ मिले हुये हैं। राजा ने तेनालीरमा की ओर देखा जो हमेसा की तरह शांत खड़े थे। राजा ने पूछा कि आप क्या सोचते हैं, तेनालीरामा।

तेनालीरामा ने कहा, “महाराज में समस्या का समाधान करता हूँ बस मुझे आप सभी के सहयोग की आवश्यकता है। राजा यह जानने के बहुत उत्सुक थे की कौन झूठ बोल रहा है। महाराज ने कहा बताओ तेनाली हमें क्या करना पड़ेगा। तेनाली ने कहा की आप सभी लोग पर्दे के पीछे छुप जाइए में अभी दूध का दूध और पानी का पानी कर देता हूँ।

Tenali Rama Short Story In Hindi

राजा इस मामले को जल्द से जल्द हल करना चाहते थे , इसलिए महाराज ने सभी को पर्दे के पीछे छुपने के आदेश दिये और सभी मंत्रियों के साथ खुद भी पर्दे के पीछे छिपने के लिए तैयार हो गए ।

अब राज कक्ष मे सिर्फ तेनाली ही खड़े थे बाँकी के सभी लोग पर्दे के पीछे छुप गए थे। उन्होने अपने नौकर से कहा की वह एक-एक करके तीन नौकरों को मेरे पास भेजे। सेवक पहले नौकर को साथ ले आया।

तेनालीरामा ने उससे पूछा, “क्या तुम्हारे स्वामी ने तुम्हारे सामने श्यामू को गठरी दी थी।” नौकर ने हाँ मे जवाब दिया। अब तेनालीरमा ने उसके सामने एक कागज और एक कलाम रख दी और कहा की उस हीरे का चित्र बनाओ। नौकर घबराकर बोला, “जब मालिक ने श्यामू को हीरे दिए, तो वह लाल गठरी में थे।”

तेनालीरामा ने कहा, “ठीक है तुम अब यही खड़े रहो।” इसके बाद, अगले नौकर को बुलाया गया। तेनालीरमा ने दूसरे नौकर से भी वही पूछा, “तुमने जो हीरे देखे हैं उसका एक चित्र बनाओ। ” नौकर ने कागज लिया और उस पर तीन गोल आकृतियाँ बना दीं।

हीरो का बंटवारा – तेनालीराम हिन्दी कहानी

अब तीसरे नौकर से पूछा गया तो उसने कहा, “मैंने हीरे नहीं देखे लेकिन वो हरी रंग की गठरी में थे।” इतने में महाराजा और बाकी मंत्री पर्दे से बाहर आ गए। उन्हें देखकर तीनों नौकर घबरा गए और समझ गए कि अलग-अलग जवाब देने से सबको समझ आ गया है की वो झूठे हैं।

वह राजा के चरणों में गिर गए और कहा कि उसकी कोई गलती नहीं है, लेकिन स्वामी ने उन्हे झूठ बोलने के लिए कहा था अन्यथा उन्हे मारने की धमकी दी थी।

नौकरों की बात सुनकर महाराज ने सैनिकों को मालिक के घर की तलाशी लेने का आदेश दिया। तीनों हीरे खोज के बाद मालिक के घर पर पाए गए। मालिक कि बेईमानी का दंड उसे मिला। राजा ने आदेश दिया की मालिक श्यामू को 1 हजार स्वर्ण मुद्रा देगा और 10 हजार स्वर्ण मुद्रा राजकोष में जुर्माने के रूप मे भरेगा। इस तरह, श्यामू को तेनालीरमा की बुद्धि से न्याय मिला और वह राजा के दरबार से खुशी-खुशी लौटा।

Tenali Rama Short Story In Hindi से हमने क्या सीखा:

इस कहानी से हमें यह पता चलता है कि अक्सर जैसा हमें दिखाई देता है वैसा नहीं होता है। हमें बस अपनी बुद्धि से काम करने की जरूरत है। 25 फलो के नाम – क्लिक करें

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Tenaliram Hindi Story : रिश्वत का आरोप

तेनालीराम की कहानी

Tenaliram Hindi Story | विजयनगर के राजा कृष्णदेव राय के दरबार में संगीतकारों, गीतकारों, कवियों, लेखकों और नर्तकों की तो भीड़ ही लगे रहती थी और लगे भी क्यों ना राजा कृष्णदेव कला प्रेमी होने के साथ-साथ कलाकारों का सम्मान जो किया करते थे।

कलाकार हर साल कला प्रतियोगिता में भाग लेते और महाराज उन्हें पुरस्कृत करते थे। ये सिलसिला हर वर्ष चलता था।

जब से महाराज को तेनालीरामा मिला था, तब से महाराज तेनालीरामा से पूछकर ही कलाकारों को उनकी कला प्रदर्शन हेतु दिये जाने वाले इनामों का फैसला लेते।

क्योंकि महाराज जानते थे की तेनालीरामा को कला का ज्ञान तो है ही साथ ही साथ वह एक बुद्धिमान व्यक्ति भी है।

बाकी दरबारी चाहते थे कि महाराज तेनालीरामा पर भरोसा करना बंद कर दे क्योंकि तेनालीरामा को दिए गए इस सम्मान से बाकी लोगों को ईर्ष्या थी।

एक बार की बात है तेनालीरामा दरबार में नहीं थे। जब दरबारियों को ये बात पता चली तो उनकी अनुपस्थिति का लाभ उठाकर दरबारियों ने राजा के कान भरने शुरू कर दिए।

उन्होंने राजा से कहा, “महाराज तेनालीरामा बहुत ही बेईमान और गिरा हुआ आदमी हैं। जिस किसी को भी पुरस्कार देना होता है, वह उससे पहले रिश्वत लेता है।

तेनालीराम की कहानी : Tenaliram Hindi Story

इसलिए, जो आप तेनालीरामा को बुद्धिमान समझ कर इन मामलों में उससे सलाह लेते हैं कृपया आपको उसे लेना बंद कर दें।“

तेनालीरामा सात-आठ दिनों के लिए दरबार में नहीं आया था, इसलिए दरबारियों ने राजा से फिर से वही बात कही। राजा ने भी सभी दरबारियों के बार-बार कहने पर तेनालीरामा पर शक करना शुरू कर दिया।

कुछ समय बीतने के बाद जब तेनालीरामा राज दरबार में हाजिर हुआ, तो उसे महाराज के मिजाज ही बदले हुए प्रतीत हुए। तेनालीरामा ने देखा कि अब महाराज ने पुरस्कार वितरण से पूर्व किसी से सलाह लेना ही बंद कर दिया है।

तेनालीरामा यह देखकर बहुत दुखी हुआ। फिर एक दिन राजा के दरबार में एक गायन प्रतियोगिता आयोजित की गई। प्रतियोगिता समाप्त होते ही तेनालीरामा ने कहा, “गायक को छोड़कर सभी को पुरस्कार मिलना चाहिए”

लेकिन राजा ने तेनालीरामा की बातों को अनसुना कर दिया और जो तेनालीरामा ने सुझाव दिया था उससे विपरीत व्यवहार किया। राजा ने उस एक गायक को पुरस्कृत किया और सभी को खाली हाथ लौटा दिया।

तेनालीराम की कहानी

तेनालीरामा को राजा के इस व्यवहार से बड़ा दुख हुआ और राजा की यह बात उसे बहुत अपमानजनक लगी। अब तेनालीरामा के इस अपमान को देखकर सभी दरबारी बहुत खुश हुए।

कुछ दिनों बाद एक बहुत ही मधुर गायक अपनी कला का प्रदर्शन करने के लिए दरबार में आया। जैसे ही राजा से अनुमति मिली तो उसने गाना शुरू कर दिया। उनकी आवाज और लहजा बहुत मधुर था।

उस दिन उस गायक ने दरबार में एक से अधिक गीत गाए जो बहुत ही मधुर थे जिसकी गूंज से पूरा राज दरबार गौरवान्वित हो गया।

जब उसका गायन समाप्त हुआ, तेनालीरामा ने गायक से कहा, “तुम्हारी आवाज़ बहुत मधुर है और शायद ही किसी ने अपने जीवन में ऐसे गीत सुने हों इस प्रतिभा के लिए आपको 10,000 सोने के सिक्के मिलने चाहिए।”

तेनालीरामा द्वारा कही गयी बातें सुनकर महाराजा ने कहा, “आपकी कला वास्तव में अद्भुत है, लेकिन हमारे खजाने में किसी भी गायक को देने के लिए बहुत पैसा नहीं है, इसलिए अब आप जा सकते हैं।”

जैसे ही गायक ने राजा की यह बातें सुनी तो गायक बहुत ही हताश हो गया और अपने वाद्य यंत्रों को बंद करने लगा। तेनालीरामा को उस प्रतिभाशाली गायक के लिए बहुत ही दुख महसूस हुआ।

Tenaliram Hindi Story

तेनालीरामा ने तुरंत ही गायक को भरे दरबार में एक गठरी दी। यह देखकर दरबारियों ने विरोध करना शुरू कर दिया। सभी ने साथ में कहा कि जब राजा ने गायक को कुछ नहीं दिया, तो तेनालीरामा कौन है जो खैरात बांट रहा है?

राजा भी तेनालीरामा के कृत्य पर बहुत क्रोधित थे। उसने नौकरों को आदेश दिया कि वह गायक से गठरी छीनकर मेरे पास लाए। नौकर ने गठरी राजा को दे दी। जब राजा ने गठरी खोली तो उसमें मिट्टी का एक बर्तन था।

मिट्टी के बर्तन को देखकर राजा ने तेनालीरामा से सवाल किया कि आप इन बर्तनों को गायक को क्यों देना चाहते हैं।

तेनालीरामा ने कहा, “महाराज, गरीब गायक को इनाम नहीं मिला, लेकिन मैं इस गायक को यहाँ से खाली हाथ वापस नहीं भेजना चाहता।

वह इस मिट्टी के बर्तन में प्रशंसा और तालियां भर कर ले जाएगा। “तेनालीरामा के मुंह से यह जवाब सुनकर, राजा को उसकी उदारता और सच्चाई का पता चला।

राजा का क्रोध गायब हो गया और राजा ने गायक को 10,000 स्वर्ण मुद्राएँ इनाम में दीं।

इस तरह तेनालीरामा ने अपनी समझ और ईमानदारी के बल पर राजा का विश्वास हासिल कर लिया। उसी समय तेनालीरामा के विरोधी उसे गुस्से से भरे मुंह से देखते रहे।

Short Story Of Tenali Rama In Hindi से हमने क्या सीखा:

इस Short Story Of Tenali Rama In Hindi से यह पता चलता है कि कभी भी सुनी सुनाई बातों पर भरोसा नहीं करना चाहिए। जो इंसान कान का कच्चा होता है वो धोखा खाता है  |

तेनालीराम की कहानीविचित्र पक्षी

बुद्धिमान हाथी की कहानी- Hindi Story For Kids

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बुद्धिमान हाथी की कहानी – Hindi Story For Kids

एक जंगल में एक हाथी अपने परिवार के साथ रहता था। एक दिन वह हाथी अपने पूरे परिवार के साथ एक जंगल से दूसरे जंगल को जा रहा था । रास्ते में हाथी को एक चमकती हुई चीज दिखाई दी । हाथी के मन में विचार आया कि आखिर यह चीज क्या है जो इतना चमक रही है।

हाथी अपनी धुन में मगन उस चीज की तरफ बढ़ता चला गया। जिस वजह से वह अपने परिवार से अलग हो गया। जैसी ही हाथी चमकती हुई चीज के पास पहुंचा तो वह कुछ और नहीं बल्कि एक कील थी, जो सूरज की रोशनी पढ़ने से इतना चमक रही थी। गलती से हाथी का पैर उस कील के ऊपर पड़ गया और वह कील हाथी के पैर में घुस गई ।

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जिस वजह से हाथी के पैर से खून ही खून बहने लगा। हाथी का पूरा परिवार काफी दूर निकल चुका था। अब हाथी किसी से मदद भी नहीं मांग सकता था। कुछ ही देर में अंधेरा हो गया। बेचारा हाथी रात भर वहीं बैठ कर दर्द के मारे कराहता रहा । जब तक हाथी के परिवार को पता चलता कि छोटा हाथी उनसे अलग हो चुका है तब तक बहुत देर हो चुकी थी ।

Hindi Story For Kids

अंधेरा काफी हो गया था इस वजह से वह अपने छोटे हाथी को नहीं ढूंढ पाए। अगली सुबह एक बूढ़ा दंपति उस रास्ते से गुजरा तो उन्होंने देखा कि एक हाथी का बच्चा लेटा हुआ है जिसके पैर से खून ही खून निकल रहा है।उन्होंने जैसे-तैसे हाथी के पास जाने की हिम्मत की । उन्होंने देखा छोटे हाथी का पैर सूजा हुआ है और एक मोटी सी कील हाथी के पैर में चुभी हुई है।

बूढ़े आदमी ने फटाफट से उस कील को निकाला और जैसे ही हाथी के पैर से कील निकली तो खून बहने लगा। इसके साथ ही हाथी का दर्द कुछ कम हुआ और उसे होश आने लगा। बूढ़े दंपति को देखकर हाथी थोड़ा सा डर गया लेकिन वह कुछ कर भी नहीं सकता था। क्योंकि उसके पैर में दर्द हो रहा था और वह समझ चुका था कि यह बूढ़ा दंपति ही उसकी मदद कर सकता है ।

हाथी के पैर से बहते हुए खून को रोकने के लिए बूढ़ी औरत ने घाव को पानी से धोकर साफ कपड़े से बांध दिया ।इतनी देर में हाथी का परिवार हाथी को ढूंढते हुए वहां पहुंच गया । हाथियों के एक झुंड को अपनी तरफ आता देख बूढ़ा दंपत्ति डर गया। वह समझ चुके थे कि यह हाथी का ही परिवार है इसलिए वह छोटे हाथी को वहीं छोड़ अपने घर की ओर चल दिए।

Hathi Ki Kahani

जैसे जैसे समय बीतता गया बूढ़ा दंपति इस घटना को भूल चुका था । जिस गांव में यह बूढ़ा दंपति रहता था वहां का जमीदार बहुत ही दुष्ट था। यह जमीदार पूरे गांव से कर वसूली किया करता था। जो भी परिवार कर नहीं दे पाता था जमीदार जबरदस्ती उनके खाने का अनाज भी अपने साथ ले जाता था ।
बूढ़ा दंपत्ति अब बीमार रहने लगा था। जिस वजह से वह अपने हिस्से का कर नहीं दे सके। इसलिए जमीदार उनके खाने का अनाज अपने साथ ले गया।एक दिन बूढ़ा दंपति जब सुबह उठा तो उनके घर के आगे एक अनाज की बोरी रखी हुई थी।

बूढ़े दंपति को यह समझ नहीं आया कि यह अनाज की बोरी कहां से आई होगी चूंकि दंपति के पास खाने के लिए अनाज की कमी थी इसलिए उन्होंने उस बोरी को अपने पास रख लिया।अब गांव में यह शोर होने लगा कि जमींदार के घर से अनाज की एक बोरी कोई उठा ले गया है।

अगले सुबह फिर से बूढ़े दंपति को अपने घर के बाहर एक चीनी की बोरी रखी हुई मिली। इस बार भी यह चीनी की बोरी जमींदार के घर से ही चुराई गई थी। अब बूढ़े दंपति को पूरा यकीन हो गया कि कोई जमींदार के घर से अनाज चोरी करके उनके घर के बाहर रख कर जाता है, लेकिन वह समझ नहीं पा रहे थे कि ऐसा कौन और क्यों कर रहा है। बुद्धिमान हाथी की कहानी

बुद्धिमान हाथी की कहानी

यह जानने के लिए उन्होंने अब रात भर जागकर पहरेदारी करने की ठानी । जैसे ही रात हुई तो उन्होंने देखा कि एक हाथी अपनी सूंड में गन्ने दबा कर लाया और उनके दरवाजे पर रख दिए। हाथी ने भी बूढ़े दंपति को देख लिया और वह उन्हीं के सामने बैठ गया बूढ़ा दंपति उस हाथी को देखकर डर गए।

दंपति को डरता देख हाथी ने अपना पांव आगे बढ़ा दिया जिस पर एक बड़े से घाव का निशान था इस घाव को देखकर बूढ़े दंपति को वह घटना याद आ गई जब उन्होंने एक छोटे हाथी के पैर से कील निकाली थी। बूढ़ा दंपति समझ गया कि यह वही छोटा हाथी है जो अब बड़ा हो गया है और उनकी मदद इसलिए कर रहा है क्योंकि उन्होंने उसकी मदद की थी ।

बूढ़ा दंपति हाथी को पहचान गया । वह हाथी के पास गए तो हाथी ने उन दोनों को सूंड से उठाकर अपनी पीठ में बैठा लिया । इतनी ही देर में जमींदार व उसके आदमी हाथी के पीछे पीछे बूढ़े दंपति के घर पहुंच गए। जमींदार और उसके आदमियों ने हाथी को अपने काबू में करने की कोशिश की लेकिन हाथी ने अपनी सूंड से सब को उठा कर फेंक दिया।

जिससे जमींदार व उसके आदमियों के हाथ पैर टूट गए। जमीदार जैसे तैसे अपनी जान बचाकर वहां से भाग गया । अब गांव में सब को पता चल गया कि हाथी बूढ़े दंपति की मदद करता है और अब जमीदार ने गांव के लोगों को परेशान करना बंद कर दिया।

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कबूतर ने केसे होशियारी से लोमड़ी से जान बचायी |

कबूतर ने केसे होशियारी से लोमड़ी से जान बचायी

एक कबूतर मस्ती से अपने लिए दाना तलाश कर रहा था |दाना ढूंढते ढूंढते वह थक गया और बैठ कर आराम करने लगा |तभी उसे एक लोमड़ी के आने की आहट हुई |वह एकदम उड़ कर पेड़ की डाली पर बैठ गया |अब लोमड़ी उसे कोई नुक्सान नहीं पहुंचा सकती थी |लोमड़ी  अपने शिकार कबूतर को देख कर मुस्कुराई और बोली, कबूतर भाई! मेरे पास तुम्हारे लिए एक अच्छी खबर है |पेड़ से नीचे उतरो मैं तुम्हे वो अच्छी खबर सुनाता हूँ |

कबूतर जानता था कि वह लोमड़ी उसका शिकार करके उसको खाना चाहती है |वह लोमड़ी से बोला, मैं जानता हूँ तुम मीठी मीठी बाते करके मुझे अपना शिकार बनाना चाहते हो |जैसे ही मै पेड़ से नीचे आऊंगा तुम मुझे पकड़ कर कहा जाओगे |मुझे तुम पर यकीन नहीं है, चालक लोमड़ी! मुझे यही से बताओ कि क्या खुशखबरी है? मैं पेड़ से नहीं उतरूँगा | कबूतर ने पेड़ पर बैठे बैठे ही कहा |लोमड़ी बोली, अच्छी खबर ये है कि कबूतर और लोमड़ी अब से दोस्त बन कर रहेंगे, अब कोई भी लोमड़ी किसी कबूतर को मार कर नहीं खाया करेगी |

अब बताओ क्या ये अच्छी खबर नहीं है |अब तो नीचे आ जाओ कबूतर दोस्त | कबूतर बोला,” लोमड़ी दीदी!मैं बेवक़ूफ़ नहीं हूँ |ऐसा किसने और कब बोला है? जिसने भी यह बोला है पहले तुम उसे अपने साथ लेकर आओ |तब ही मैं तुम्हारी बात मानूंगा |लोमड़ी बोली, “कबूतर भाई, तुम तो मुझे झूठा समझ रहे हो |मैं झूठ नहीं बोल रही हूँ |तुम चाहो तो मेरे साथ चल सकते हो |कबूतर को अब पक्का यकीन हो गया था कि लोमड़ी उसका शिकार करके उसको खाना चाहती है |

कबूतर ने केसे होशियारी से लोमड़ी से जान बचायी |

वह बोला, ऐसा कोई समझौता शेर के साथ भी हुआ है क्या कि अब से लोमड़ी और शेर दोस्त बन कर रहेंगे? शेर का नाम सुनकर लोमड़ी डर के मारे काँपने लगती है |वह कहती है,”शेर के साथ? अरे नहीं!शेर के साथ ये समझौता नहीं हुआ है |लेकिन तुम शेर का नाम क्यों ले रहे हो? लोमड़ी डरती हुई बोली |कबूतर बोला, “अच्छा!लेकिन मुझे तो तुम्हारे पीछे शेर आता हुआ दिखाई दे रहा है |शायद वह तुमसे मिलने के लिए आ रहा है”| यह सुनकर लोमड़ी हड़बड़ा कर बोलती है,”कहाँ है शेर? कहाँ है शेर? मुझे तो शेर नहीं दिखाई दे रहा है “|

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कबूतर ने कहा, तुम नीचे खड़ी हो ना, इसलिए तुम शेर को नहीं देख पा रही हो |मैं पेड़ के ऊपर बैठा हूँ इसलिए मुझे शेर आता दिखाया दे रहा है | अरे बाप रे! एक शेर नहीं ये तो बहुत सारे शेर हैँ |शेर के पीछे और भी बहुत सारे शेर हैँ | ये कहकर कबूतर ज़ोर ज़ोर से हँसने लगा | ये सुनकर कि बहुत सारे शेर लोमड़ी के पास आ रहे हैँ, लोमड़ी दुम दबाकर वहां से भाग जाती है | कबूतर को उस पापी लोमड़ी से छुटकारा मिल गया और लोमड़ी को अच्छा सबक मिला |

अब कबूतर आराम से पेड़ से नीचे उतरा और अपने लिए दाना तलाश करने लगा | बच्चों इस कहानी से हमें यह सीख मिलती है कि चाहे कैसी भी मुश्किल आ जाये हमें घबराना और डरना नहीं चाहिए | अपनी सूझ बूझ से उस मुश्किल का हल ढूंढ़ना चाहिए |अगर वह कबूतर उस लोमड़ी कि बात मान लेता तो वह लोमड़ी कबूतर को अपना भोजन बना कर खा जाती |

बेवकूफ राजा की कहानी | Hindi story for kids

बेवकूफ राजा की कहानी | Hindi story for kids

बेवकूफ राजा की कहानी | Hindi story for kids

बच्चो के लिए हिन्दी कहानी

कुछ साल पुरानी बात है|एक राजा को अच्छे अच्छे और नये नये कपडे पहनने का बहुत शौक था |वह अपने राज्य का सारा धन अपने कपड़ो पर ही खर्च कर देता था| वह  रोज़ रोज़ नए कपडे पहनता था |कपड़ो के आगे उसे अपनी प्रजा की भी कोई परवाह नहीं थी | एक दिन दो चालक आदमी राजा के दरबार में आये| उनका कहना था कि वो दोनों बहुत खास तरह के कपडे बनाते हैँ|उनके  द्वारा बनाये गए कपडे उनके द्वारा बनाये गए कपडे केवल बुद्धिमान लोगो को ही दिखाई देते हैँ |

बेवकूफ लोग उनके द्वारा बनाये गए कपडे नहीं देख सकते हैँ| राजा को उन  दोनों के बारे में पता चला तो राजा की ख़ुशी का ठिकाना नहीं रहा| उसने सोचा अब तो मैं ऐसी पोशाक पहनूंगा जो सिर्फ बुद्धिमान लोगो को ही दिखाई दे |इस तरह मुझे बुद्धिमान और बेवकूफ लोगो को छाँटने में आसानी होंगी |

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राजा की कहानी

अगले दिन राजा ने उन दोनों कपडे बनाने वाले आदमियों को अपने महल में बुलावाया और कहा कि मेरे लिए अच्छे से अच्छे कपडे बना कर दो |यह कहकर राजा ने उन  दोनों को अशरफियों कि थैली, कपडे तैयार करने का सामान, सुई, कैंची, रेशम आदि दिया |  दोनों कपडे बनाने वाले आदमी सामान लेकर वहां से चले गए | कपडे बनाने वाले राजा के लिए सुन्दर कपडे बनाने में जुट गए | इसी तरह कई दिन और हफ्ते गुज़र गए |

लगभग एक महीने बाद कपडे बनाने वालो ने घोषणा की कि राजा के कपडे बनकर तैयार हैँ |राजा के महल में पहुंचकर दोनों ने राजा को अपने बनाये हुए कपडे दिखाए |पर यह क्या? राजा को तो कपडे दिखाई ही नहीं दे रहे थे |राजा ने सोचा अगर में ये कहूंगा कि मुझे कपडे दिखाई नहीं दे रहे हैँ तो सारी प्रजा मेरा मज़ाक उड़ाएगी कि राजा बेवक़ूफ़ है, क्योंकि राजा को कपडे दिखाई नहीं दे रहे हैँ |

बेवकूफ राजा की कहानी | Hindi story for kids

बेवक़ूफ़ कहलाये जाने के डर से राजा ने कहा, अरे वाह! क्या पोशाक बनायीं है |कितनी सुन्दर है! इसका रंग कितना अच्छा है, इस पर कितनी अच्छी कलाकारी कि गयी है |राजा ने उन्हें सोने कि अशरफियाँ दी और वो दोनों वहां से चले गए |दरअसल, वो दोनों लोग बहुत चालक थे उन्होंने राजा को बेवक़ूफ़ बना कर राजा से इनाम भी ले लिया और राजा को कोई कपडे भी बना कर नहीं दिए | उनकी बेवक़ूफ़ और बुद्धिमान वाली बात झूठी थी |वे कोई कपडे नहीं बनाते थे |सारे राज्य मे शोर मचा हुआ था कि आज राजा ने ऐसे कपडे पहने जो केवल बुद्धिमान लोग ही देख सकेंगे, बेवक़ूफो को राजा के कपडे नहीं दिखाई देंगे |

सारे दरबारी, सेवक राजा के आने का इंतज़ार करने लगे |जैसे ही राजा बाहर आया सभी लोग दंग रह गए, क्योंकि किसी को भी राजा के कपडे दिखाई नही दे रहे थे| लेकिन बेवक़ूफ़ कहलाये जाने के डर से किसी की ये बोलने कि हिम्मत नहीं हुई कि उसको राजा के कपडे दिखाई नहीं दे रहे हैँ |सारे दरबारी एक एक करके राजा के कपड़ो कि तारीफ करने लगे |

जनता और राजा का डर

अरे वाह राजा जी!”कितने सुन्दर कपडे हैँ आपके”,एक बोला | दूसरा बोला, “कपड़ो का डिज़ाइन तो देखो”,कितना अच्छा है|  उनमे से कोई भी नहीं चाहता था कि वह ये कहकर कि उसे कपडे दिखाई नहीं दे रहे हैँ, बेवक़ूफ़ कहलाये,क्योंकि कपडे बनाने वालो ने कहा था कि ये कपडे सिर्फ बुद्धिमान लोग ही देख सकते है |

तभी एक छोटी लड़की ज़ोर से चिल्लायी, अरे!!!आप सब किन कपड़ो कि तारीफ कर रहे हैँ |राजा ने तो कुछ भी नहीं पहना हुआ है |यह सुनते ही राजा शर्मिंदा हो गया और सभी लोग ज़ोर ज़ोर से हँसने लगे |राजा को बहुत गुस्सा आया, उसने उन दोनों लोगो को ढूंढ़ने के लिए अपने सैनिको को भेजा |तब से राजा ने प्रण लिया कि वो ऐसे ही किसी कि बात में नहीं आएगा और अपने कपड़ो से ज़्यादा अपनी प्रजा का ध्यान रखेगा |

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छोटा तीरंदाज़ | बच्चो के लिए हिन्दी कहानी |

छोटा तीरंदाज़ | बच्चो के लिए हिन्दी कहानी |

एक व्यक्ति था जो बहुत बुद्धिमान और गज़ब का तीरंदाज़ था लेकिन वह हमेशा इस बात को लेकर परेशान रहता था की राजा की सेना मे उसे भर्ती नही किया जायेगा क्यूंकि उसका कद बहुत छोटा था | लेकिन इसका हल भी उसने खोज निकाला – उसने सोचा मुझे कोई ऐसा आदमी का साथ चाहिए जो बहुत ताकतवर हो | मे उसे राजा की सेना मे भर्ती होने के लिए कहूँगा फिर उसके साथ लड़ने जाया करूंगा |

एक दिन उसकी खोज पूरी हुई और उसको एक ताकतवर इन्सान मिल गया| उसने देखा एक ताकतवर इन्सान मजदूरी कर रहा है वह बहुत लम्बा चोडा पहलवान जेसा इन्सान था | नाटा आदमी उसके पास गया और बोला सुनो अगर तुम राजा के महल मे काम करने लगो तो केसा रहेगा | पहलवान बोला लेकिन मुझे तो कुछ काम नहीआता राजा मुझे अपने यहाँ नोकरी क्योँ देगा |

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नाटा आदमी बोला मे बहुत अच्छा तीरंदाज़ हूँ लेकिन मेरे नाटे कद की वजह से शायद राजा मुझे अपने सनिको मे भर्ती नही होने देगा | लेकिन तुम्हारे कद काठी की वजह से राजा तुम्हारी भर्ती कर लेगा मे तुम्हारे साथ तुम्हारी ढाल बनकर रहूँगा | और तुम्हे जो वेतन मिलेगा उसका हम आधा आधा कर लेंगे |

पहलवान को यह सुझाव अच्छा लगा | उसने सोचा मुझे मजदूरी भी नही करनी पड़ेगी और काम भी उस नाटे तीरंदाज़ को करना होगा मुझे तो मुफ्त मे आधी तनख्वा मिल जाएगी | वह राज़ी हो गया और दोनों राजा के पास गए और उस आदमी ने राजा से अपनी सेना मे उसे शामिल करने की अर्जी की | राजा भी इतने ताकतवर व्यक्ति को देख कर खुश हो गया और उसको अपनी सेना मे भर्ती कर लिया |

छोटा तीरंदाज़ | बच्चो के लिए हिन्दी कहानी |

जब कभी कोई बाहरी शत्रु राजा के राज्य मे घुसने की कोशिश करता या राजा कोई मुसीबत देखता तो उस पहलवान को भेज देता | नाटा तीरंदाज़ भी उसके साथ जाता | जेसे की नाटा व्यक्ति तीरंदाजी मे बहुत अच्छा था वह हर बार अपने तीरंदाजी से शत्रु पर तीरों की बारिश करके उनको मार देता | राजा बहुत खुश होता था लेकिन उसको यह लगता था यह काम पहलवान करता है | वह पहलवान की तारीफ करता और उसको इनाम भी देता था |

इससे पहलवान को यह लगने लगा उसको तीरंदाज़ की ज़रूरत नही है उसको अपना इनाम और वेतन तीरंदाज़ से बाटने की ज़रूरत नही है | इसलिए अब वह तीरंदाज़ से गुस्सा रहने लगा | लेकिन एक दिन एक बड़ी मुसीबत सामने आ गई | राजा के राज्य मे दुसरे राजा ने धावा बोल दिया | उसकी सेना बहुत बड़ी थी | राजा को लगता था पहलवान बहुत बाहुदर है इसलिए उसको सबसे आगे भेजा गया |

पहलवान बहुत घबरा गया था लेकिन तीरंदाज़ बोला तुम्हे घबराने की ज़रूरत नही है मे तुम्हारे पीछे रहूँगा और शत्रु को खतम कर दूंगा | जेसे ही वह मेदन मे गए वहां दूसरे राजा की सेना देख कर पहलवान बहुत डर गया और कूद कर वहां से भाग गया | लेकिन तीरंदाज़ वही रहा यही सही समय था उसको अपनी तीरंदाजी दिखाने का | उसने शत्रु की सेना पर बाड़ो की वर्षा कर दी जिससे घबरा कर दुश्मन मैदान छोड़ कर भाग खड़े हुए |

फिर वह जीत का परचम लहराता हुआ राजा के महल मे गया अब राजा जान चुका था असली बाहदुर कोन है उसने तीरंदाज़ को इनाम दिया और अपने महल मे बड़ा सेनापति बना लिया | अगर आप काबिल हैं तो आपको अपनी काबिलयत के हिसाब से स्थान ज़रूर मिलता है बस उसके लिए थोडा इंतज़ार करना पड़ता है |

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बुरी संगत | शेर और भेडिये की कहानी

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बुरी संगत | शेर और भेडिये की कहानी बुरी संगत |

किसी जंगल मे एक आलसी और दुष्ट भेड़िया रहता था | वह कुछ काम नही करता था और इसी जुगाड़ मे रहता था कोई उसके लिए शिकार का इंतेज़ाम कर दे| एक दिन उसकी मुलाकात एक नोजवान शेर से हुई | उसने उसे मीठी मीठी बाते करके अपनी मित्रता के जाल मे फंसा लिया |शेर के माता पिता जानते थे भेड़िया बहुत दुष्ट है इसलिए उन्होंने शेर को पहले ही चेतावनी दी हुई थी कभी भी भेडिये से दोस्ती मत करना | उसके वजह से तुम मुसीबत मे पड़ सकते हो इसलिए उससे हमेशा दूर रहना | लेकिन शेर ने उनकी बात नही मानी और भेडिये से दोस्ती करली |

अब शेर और भेड़िया अच्छे दोस्त बन गए थे | शेर शिकार करके लाता और भेड़िया और शेर दोनों मिलकर उसको खाते थे | एक दिन भेडिये की नज़र घोड़ो पर पड़ी वह झील के किनारे पानी पी रहे थे | घोड़ो को देख कर भेडिये के मुंह मे पानी आ गया | उसने एक योजना बनाई केसे वो शेर को घोड़े का शिकार करने के लिए राज़ी करेगा |

उसने जाकर शेर को बोलो हम रोज़ बकरी और दुसरे जानवर खा कर बोर हो गए हैं क्योँ ना कुछ अलग किया जाये |शेर बोला तुम क्या कहना चाहते हो भेड़िया बोला मेने झील के किनारे बहुत अच्छे घोड़े देखे हैं और मेने सुना है घोड़ो का मॉस खा कर बहुत शक्तिशाली हो जाते हैं तुम उनका शिकार करो | शेर ने कहा ठीक है तुम मुझे उस झील के पास ले जाओ जहाँ घोड़े आते हैं मे उनका शिकार करूंगा | भेड़िया शेर को वहां ले गया और शेर झाड़ी के पीछे छुप गया जेसे ही घोड़े वहां आये शेर ने हमला करके एक घोड़े को पकड़ लिया और शेर और भेडिये दोनों ने उसकी दावत उडाई |

बुरी संगत | शेर और भेडिये की कहानी |

शेर के माता पिता को जब इस बात का पता चला की शेर ने घोड़े का शीकार किया है वो बहुत परेशान हो गए क्यूंकि उनको पता था वह घोड़े राजा के हैं और राजा को अगर यह बात पता चली तो वह शेर को मरवा देंगे | उन्होंने शेर को बुलाया और समझाया बेटा तुम भेडिये से दूर रहो उसकी संगत अच्छी नही है वह तुम्हे मुसीबत मे डाल देगा | तुम जिस घोड़ो का शिकार कर रहे हो वह राजा के हैं और राजा को अगर यह बात पता चल गई वह तुम्हे मार देगा |

लेकिन शेर ने अपने माता पिता की एक नही सुनी और वहां से चला गया | और रोज़ घोड़े का शिकार करने लगा जब यह बात राजा को पता चली उसने अपने महल मे ही घोड़ो के लिए पानी का इंतेज़ाम कर दिया वह शेर को नही मारना चाहता था क्यूंकि वह शेर के माता पिता को जानता था | शेर के माता पिता राजा के दोस्त थे |

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लेकिन भेड़िया बहुत दुष्ट था |उसने शेर को भड़का दिया तुम बहुत ताकतवर हो तुम राजा के महल मे जाकर भी घोड़े को मार कर ला सकते हो | तुम बहुत ताकतवर हो तुम्हे डरने की कोई ज़रूरत नही है | शेर ने सोचा भेड़िया सही कह रहा है, तभी तो राजा ने मुझसे डरकर घोड़ो को अपने महल मे रख लिया है |

यह सोचते हुए वह घोड़े के शिकार के लिए महल की तरफ चल पड़ा | जब राजा ने शेर को महल मे देखा उसको बहुत गुस्सा आया और उसने अपने सैनिक को आदेश दिया शेर को मार डालो | सनिको ने तीर कमान से उसपर वार किया और उसको मार डाला |भेड़िया डर कर वहां से भाग गया , पर शेर को अपने माता पिता का कहना ना मानने के कारण अपनी जान गवानी पड़ी |

जो अपने बडो का कहना नही मानता , और बुरे लोगो की संगती मे रहता है उसे इसी तरह अपनी जान गवानी पडती है |

केसे बने कुत्ता बिल्ली दुश्मन | हिन्दी कहानियां |

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कुत्ता बिल्ली केसे बने दुश्मन | बच्चो के लिए हिन्दी कहानी |

बहुत समय पहले की बात है एक गाँव में एक पति पत्नी रहते थे वह हमेशा खुश रहते थे | उन्होंने दो जानवर कुत्ता और बिल्ली पाल रखे थे | उनके घर में एक हीरा था जोकि एक लक्की (किस्मत वाला ) हीरा था जिसके वजह से उनके घर में हमेशा खुशियाँ रहती थी और उसकी वजह से ही उनको कभी खाने पिने की कमी नही रहती थी | हालंकि उनको इसकी जानकारी नही थी की वह हीरा उनके लिए कितना लक्की है | (Hindi story for kids -और कहानी पढने के लिए क्लिक करें )

एक दिन उस आदमी की पत्नी अचानक बड़ी बीमार हो गयी जिसकी वजह से उनको बहुत सारे पैसो की ज़रूरत पड़ गयी | उस आदमी ने वह लकी हीरा बेचकर पैसे इकठ्ठा कर लिए और कुछ दिन बाद उसकी पत्नी ठीक हो गयी | लेकिन उस लकी हीरे के जाने की वजह से घर में बड़ी तंगी आ गयी | उनके पास खाने तक के पैसे नही बचे | अब दोनों जानवर कुत्ता और बिल्ली को भी खाने के लिए कुछ नही मिलता था | दिन बड़े परेशानी में गुज़र रहे थे |

हिन्दी कहानियाँ | कुत्ते बिल्ली की कहानी |

दोनों जानवरों कुत्ता और बिल्ली को पता चल गया यह सब उस लकी हीरे के जाने की वजह से हुआ है | उन्होंने तय किया वह उस हीरे को वापस लायेंगे | कुत्ते को एक idea आया | वह बिल्ली से बोला तुम अपने दोस्त चूहे को बोलो वह हमारी मदद करे | चूहा उस लकड़ी की अलमारी को कुतर दे जिसमे वह हीरा रखा है और वह हीरा लाकर हमे देदे | वह बहुत छोटा होता है किसी को पता भी नही चलेगा साथ ही उसके दांत कुतरने के लिए बहुत तेज़ होते हैं |

बिल्ली को यह idea बहुत पसंद आया उसने अपने दोस्त चूहे को यह योजना बताई चूहा अपनी दोस्त की मदद करने के लिए तेयार हो गया | तीनो जिस घर में वह खरीदार रहता था उस घर की तरफ चल दिए | रस्ते में एक नदी आई | लेकिन बिल्ली और चूहे को तेरना नही आता था लेकिन कुत्ते को तेरना आता था उसने दोनों को अपनी पीठ पर बैठा कर आराम से नदी पार करा दी |

खरीदार के घर पर पहुचने के बाद बिल्ली ने चूहे को बोला हम दोनों बाहर खड़े हैं तुम जाओ और जल्दी से अपना काम करो और हीरा लेकर आ जाओ | चूहा गया और अलमारी में छेद करके वह हीरा निकाल लाया और अपनी दोस्त बिल्ली को वह हीरा दे दिया | बिल्ली ने वह हीरा अपने पास रख लिया |

केसे बने कुत्ता बिल्ली दुश्मन | बच्चो के लिए हिन्दी कहानियां |

फिर तीनो नदी पार करके अपने मालिक के घर की तरफ आने लगे | लेकिन कुत्ता नदी पर करने की वजह से बड़ा थक गया था उसने बोला बिल्ली क्योँ न हम थोड़ी देर आराम कर लें उसके बाद मालिक को जा कर यह हीरा दे आयेंगे में बहुत थक गया हूँ | बिल्ली ने बोला ठीक है वह दोनों वहाँ आराम करने लगे चूहा अपने घर चला गया |कुत्ता थका होने की वजह से सो गया लेकिन बिल्ली जाग रही थी उसकी दिमाग में एक चुतराई आई उसने सोचा क्योँ न में जाकर यह हीरा मालिक को दे दूँ इससे मुझे ज्यादा शाबाशी मिलेगी | यह सोचते हुए बिल्ली उठी और अपने मालिक के घर की तरफ चल पढ़ी उसने घर पहुंच कर अपने मालिक को बताया केसे वह हीरा उनके लिए लकी है |

दोनों पति पत्नी बड़े खुश हुए और सोचने लगे बिल्ली हमसे कितना प्यार करती है वह उसको शाबाशी देने लगे और बहुत प्यार करने लगे | तभी कुत्ता भी हांफता हुआ वहां आ गया दोनों उसको देख कर बड़ा गुस्सा हुए और बोले यह नाकारा कुत्ता किसी काम का नही है इसने हीरा वापस लाने के बारे में सोचा भी नही | उन्होंने कुत्ते को घर से बाहर निकाल दिया |कुत्ते को बिल्ली पर बहुत गुस्सा आया क्यूंकि उसने मालिक को नही बताया यह सब उसकी योजना थी | तभी से कुत्ते और बिल्ली में दुश्मनी हो गयी वह जहाँ भी एक दुसरे को देखते हैं लड़ पड़ते हैं |

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बिल्ली की कहानी – हिन्दी कहानियां

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बिल्ली की कहानी – Hindi story | छोटे बच्चो के लिए दिलचस्प बिल्ली की कहानी केसे बिल्ली जंगल छोड़ कर हमारे साथ रहती है | यह हिन्दी story छोटे बच्चो के लिए बनाई गयी है आपको पसंद आये तो निचे कमेन्ट ज़रूर करें | साथ ही इस website पर आपको ढेर सारी बच्चो की कहानी पोएम सब मिल जाएँगी | चलिए कहानी शरू करते हैं –

बिल्ली की कहानी -हिन्दी कहानी

बहुत समय पहले की बात है | किसी जंगल में एक बिल्ली अपने भाई चीते (टाइगर ) के साथ रहती थी उसका भाई जंगल का राजा था बिल्ली को यह बात बहुत अच्छी लगती थी के उसका भाई जंगल का राजा है वह सबका ख्याल रखेगा सबको खुश रखेगा |

लेकिन असल में ऐसा नही था टाइगर को बस अपने दोस्तों की परवाह थी वह अपनी बहन का भी ख्याल नही रखता था वह मजे से अपना शिकार करता और बचा हुआ खाना अपने दोस्तों में बाँट देता था | उसके दोस्त सियार और लोमड उसके साथ मजे से रहते थे | बेचारी बिल्ली को कुछ भी खाने को नही मिलता था | टाइगर को अपने दोस्त पसंद थे वो हमेशा उनके साथ रहता था |

बिल्ले और बिल्ली की मनोरंजक कहानी – पढने के लिए क्लिक करें

बिल्ली बिचारी चूहे , मेंडक , आदि खा कर अपना पेट भरती थी | उसने काफी बार अपने भाई को समझाना चाहा लेकिन उसका भाई टाइगर उसकी नही सुनता था | टाइगर हमेशा गुस्से में रहता था उसकी बहन जब भी उससे कुछ कहना चाहती वो उसको डांट कर भगा देता था |

एक बार टाइगर की तबियत खराब हो गयी | उसके दोस्त उसका हाल पूछने उसके पास आये टाइगर ने अपनी बहन बिल्ली से बोला मेरे दोस्त आये हैं इनके लिए कुछ खाने के लिए लाओ | बिल्ली के पास तो खुद कुछ खाने के लिए नही होता था उसने टाइगर से बोला घर में तो कुछ है ही नही में कहाँ से कुछ लाऊं |

यह सुनकर टाइगर को गुस्सा आ गया वो बिल्ली को डांटते हुए बोला जंगल के बाहर लोगो का घर है तुम वहां से कुछ लेकर आओ | बिल्ली लोगो के घर की तरफ चल पड़ी | उसको गुस्सा आ रहा था उसका भाई उसको डांटता है और खाने के लिए भी कुछ नही देता है |

Billi ki kahani | बच्चो के लिए हिन्दी कहानी |

रास्ते में उसे बच्चे मिले उन्होंने बिल्ली को पकड़ लिया | बच्चो को बिल्ली बहुत अच्छी लगी वह उसको दुलारने पुचकारने लगे | बिल्ली भी बच्चो के साथ बहुत अच्छा महसूस कर रही थी उसको इतना प्यार जो मिल रहा था |

इस खेल और प्यार में बिल्ली की टाइगर की बात भूल गयी | टाइगर बिल्ली की इंतज़ार कर रहा था जब बहुत देर हो गयी टाइगर को बहुत गुस्सा आया उसने दहाड़ते हुए जोर से आवाज़ की बिल्ली को अपने भाई टाइगर की आवाज़ आई वो भाग कर अपने भाई के पास सामान लेकर पहुंची |

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टाइगर को बिल्ली पर बहुत गुस्सा आया क्यूंकि उसके दोस्त चले गये थे उसने बिल्ली को गुस्से में बहुत डांटा और ऐसे पंजा ऊपर किया जेसे वो बिल्ली को मार देगा | बिल्ली जान बचा कर वहां से भाग गयी और जंगल के बाहर लोगो के घर में रहने लगी |

वहां बच्चे उसको बहुत प्यार करते थे | उसके लिए दूध रोटी लाते थे | बिल्ली को वहां बहुत प्यार मिल रहा था बिल्ली ने तय कर लिया अब वह जंगल नही जाएगी | तब से वह हमारे साथ हमारे घरो में रहने लगी | इसलिए वह जंगल में नही रहती हैं |

Billi ki kahani

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बिल्ली की समझदारी | Hindi Story for kids |

बिल्ली की समझदारी | Hindi Story for kids |

बिल्ली की समझदारी | Hindi Story for kids |

एक भेड़िये ने गाँव में कबूतरों के बाड़े के पास नीचे खुदाई करके अपने लिए रास्ता बना रखा था | वह रोज़ रात को चोरी से कबूतरों के बाड़े में जाता और कबूतर खाकर अपना पेट भरकर वापस आ जाता |उसकी इस हरकत के बारे में किसी को पता नहीं चलता था | बाड़े में बहुत सारे कबूतर थे इसलिए किसान को उसकी हरकत के बारे में पता ही नहीं चला|
एक दिन भेड़िया कबूतर खा कर बाहर आ रहा था कि उसे बिल्ली ने देख लिया | बिल्ली ने पूछा तुम कहाँ से आ रहे हो ? भेड़िया बोला – “मैं तो दावत उड़ा कर आ रहा हूँ | तुम भी दावत उड़ाना चाहती हो तो मेरे साथ आ सकती हो | अन्दर बहुत ही स्वादिष्ट कबूतर हैं |”

बिल्ली घर में क्योँ रहती हैं – बिल्ली की कहानी बच्चो के लिए

बिल्ली की समझदारी | Hindi Story for kids |
बिल्ली की समझदारी | Hindi Story for kids |

भेड़िये की बात बिल्ली को अच्छी लगी | उसके मुंह में पानी आ गया | अलगे दिन वह भी भेड़िये के साथ चल पड़ी | बिल्ली थोड़ी समझदार थी वह भेड़िये से बोली -“इंसान बहुत चालाक होते हैं , इसलिए इनसे सावधान रहना |”
भेड़िया शेखी भंगारते हुए बोला -” अरे ! मैं तो बहुत दिनों से यहाँ कबूतर खाने आता हूँ | किसी को खबर तक नहीं हुई , तुम चिंता मत करो |”

फँस गये बिल्ली और भेड़िया ( Hindi cat story for kids )

भेड़िये और बिल्ली ने कुछ दिन तो मज़े उड़ा लिए , लेकिन एक दिन किसान को उनके बारे में पता चल ही गया |
किसान ने अपने नौकरों से कह कर एक गहरा गड्ढा खुदवाया और उसे पत्तो से ढक दिया | अगले दिन जब भेड़िया और बिल्ली आए ,तो वो दोनों उस गड्ढे में धडाम से जा गिरे |

बिल्ली और बिल्ले की कहानी – क्लिक करें


भेड़िया बोला , “तुम सही कह रही थी , हमे सावधान रहना चाहिए था | तुम समझदार हो | अब तुम ही यहाँ से बाहर निकलने का तरीका बताओ |”
बिल्ली बोली – “हमे मरने का झूठा नाटक करना पड़ेगा |

तभी हम इस गड्ढे से बाहर निकल सकते हैं | किसान और उसके नौकर हम पर लाठियां बरसा सकते हैं , लेकिन हमें दर्द सहना पड़ेगा और हमें बिल्कुल भी हिलना नहीं हैं |जब उन्हें यकीन हो जायगा कि हम मर गए हैं तो वो हमे खुद ही बाहर फेंक देंगे |”

बिल्ली की कहानी


भेड़िये को बिल्ली की बात सही लगी | जब किसान और उसके नौकर भेड़िये और बिल्ली को देखने आये तो वो दोनों मरने का नाटक कर के लेट गए | किसान उन दोनों को हिला-डुलाकर देखने लगा ,लेकिन वो दोनों बिलकुल नहीं हिले | तब किसान को यकीन हो गया कि वो दोनों मर गए हैं |

उसने अपने नौकरों से कहा कि इन् दोनों को गड्ढे से निकालकर बहार फेंक दो |
उन्होंने दोनों को गड्ढे से निकाला और बाहर फेंक दिया | इस तरह दोनों की जान बच गयी | उस दिन के बाद से भेड़िया और बिल्ली कबूतरों के बाड़े के आस-पास भी नहीं दिखे|

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