खरगोश और भेड़िया की कहानी – हिंदी कहानी |

खरगोश और भेड़िया की कहानी - हिंदी कहानी

खरगोश और भेड़िया की कहानी- एक चतुर खरगोश अक्सर छोटे भेड़िए को मूर्ख बना कर उसका मजाक उड़ाया करता था। एक दिन भेड़िए ने किसी की आवाज सुनी, “हाय ! ओह!! अरे!!!” जब भेड़िए ने अपने आसपास देखा, तो वहां एक खरगोश भारी पत्थर को सहारा दिए खड़ा था। “यह तुम क्या कर रहे हो?” भेड़िए ने

हैरान होकर पूछा। “मैंने इस भारी पत्थर से आसमान को रोक रखा है। अगर यह पत्थर हिला, तो आसमान हम पर गिर पड़ेगा और हम सब दब कर मर जाएंगे,” खरगोश ने जवाब दिया।

मासूम भेड़िया बोला, “मुझे तो किसी ने बताया ही नहीं कि आसमान गिरने वाला है। क्या मैं तुम्हारी कोई मदद कर सकता हूं?” “हां, तुम इस भारी पत्थर को हाथ से सहारा दे दो। मैं इसे टिकाने के लिए कोई टहनी खोज लाता हूं,” खरगोश ने भेड़िए से विनम्रतापूर्वक कहा।

भेड़िए ने पत्थर को हाथों से सहारा दिया और खरगोश वहां से चलता बना। कुछ ही देर में भेड़िया बुरी तरह थक गया। उसने खरगोश को आवाजें लगाईं, लेकिन खरगोश वहां से रफूचक्कर हो चुका था। वह अपने दोस्तों के बीच शेखी बघार रहा था कि उसकी चाल कितनी कामयाब रही।

भेड़िए के पंजे फिसलने लगे। ‘कोई बात नहीं… अगर आसमान गिरता है, तो गिर जाए। अब मैं इसे और नहीं संभाल सकता,’ उसने सोचा। फिर वह पत्थर से हाथ हटा कर वहीं बैठ गया। पर यह क्या! न तो आसमान गिरा और न ही वह पत्थर लुढ़का। उसे यह जान कर बहुत गुस्सा आया कि खरगोश उसे मूर्ख बना कर, उसके चंगुल से बच कर निकल गया था।

लेकिन भेड़िए ने अभी सबक नहीं लिया था। एक बार वह फिर से खरगोश की बातों के जाल में आ गया। वह तो हमेशा का ही मूर्ख ठहरा। कुछ ही दिनों बाद छोटे भेड़िए ने शाम को किसी के द्वारा ‘सड़प-सड़प’ कर पानी पीने की आवाज सुनी।

भेड़िया उस ओर जा पहुंचा। वहां उसने खरगोश को नाले का पानी पीते हुए देखा। वह इस तरह पानी के बड़े-बड़े घूंट भर रहा था, मानो सारा नाला ही पी जाएगा। भेड़िए ने बहुत दिमाग लगाया, पर उसे खरगोश के इस बर्ताव का कारणं समझ में नहीं आया। जब उससे नहीं रहा गया, तो उसने पूछ ही लिया, “खरगोश! तुम जल्दी-जल्दी इतना पानी क्यों पीते जा रहे हो?”

खरगोश तो इसी इंतजार में था कि भेड़िया उसके पास आए। उसने कहा, “क्या तुम्हें नाले में पनीर का टुकड़ा दिखाई दिया?” भेड़िए को नाले में चांद की परछाईं दिखी और उसे लगा कि वह पनीर का टुकड़ा है।

“वाह! यह हमें कैसे मिल सकता है?” भेड़िए ने ललचा कर पूछा।

“मुझे लगता है कि अगर हम इस नाले का सारा पानी पी लें, तो यह पनीर हमें मिल सकता है। पर एक ही परेशानी है…,” खरगोश ने बात बनाई। भेड़िया उसके जाल में फंस रहा था। “कैसी परेशानी?” भेड़िए ने पूछा।

“देखो, मेरा तो छोटा-सा पेट है। मैं भला कितना पानी पी सकता हूं। तुम मुझसे बड़े हो। अगर तुम भी पानी पियो, तो नाले का पानी जल्दी खत्म हो जाएगा,” इस प्रकार खरगोश ने अपनी चाल चली। भेड़िया उसकी बातों में आ ही गया। वह पनीर खाने के लालच में नाले के पानी से बड़े-बड़े घूंट भरने लगा और खरगोश सीटी बजाते हुए वहां से चल दिया। उसे अपने दोस्तों को खोज कर यह बताना था कि उसने आज फिर भेड़िए को कैसे मूर्ख बनाया है।

उधर भेड़िया लालच के मारे तब तक पानी पीता रहा, जब तक उसका पेट फटने नहीं लगा। फिर भी नाले का पानी कम होने का नाम ही नहीं ले रहा था। जब वह अधमरा हो गया, तो उसने तय किया कि पनीर न खाना ही बेहतर होगा और वह अपना-सा मुंह ले कर वहां से लौट गया।

बुद्धिमान खरगोश – बच्चो के लिए खरगोश की कहानी |

बुद्धिमान खरगोश – बच्चो के लिए खरगोश की कहानी |

बच्चो के लिए खरगोश की कहानी

खरगोश की कहानी – किसी जंगल में एक शेर रहता था। वैसे तो शेर बहुत बलशाली होता है, लेकिन अगर बहुत से जंगली जानवर मिल कर उसका पीछा करने लगें, तो उस भी भागना पड़ता है। इस शेर के साथ भी यही हुआ। उसके पीछे जंगली कुत्तों का एक झुंड पड़ गया। शेर तेजी से भागने लगा, ताकि उनसे अपनी जान बचा सके। लेकिन वे उसका पीछा ही नहीं छोड़ रहे थे। ऐसे में शेर भागते-भागते थक गया था।

तभी उसे पेड़ के नीचे बैठा भोला दिखाई दिया। उसने सोचा कि भागने से कोई फायदा नहीं। वह कुत्तों का मुकाबला नहीं कर सकता, इसलिए छिपने में ही भलाई है। उसने भोला के आगे हाथ जोड़कर कहा, “ये जंगली कुते मुझे मार डालेंगे। मेहरबानी करके मुझे कहीं छिपा दो।”

भोला ने पेड़ के पीछे वाली झाड़ियों में शेर को छिपा दिया। जब जंगली कुत्ते वहां आए, तो उन्होंने भोला से पूछा, “क्या तुमने किसी शेर को यहां से जाते देखा है?” उसने कहा, “हां, वह अभी उस पहाड़ी की ओर गया है।” यह सुन कर सारे कुत्ते पहाड़ी की ओर चल दिए।

शेर ने कुछ देर इंतजार किया और फिर बाहर आ गया। बाहर आते ही उसने भोला को दबोच लिया।

“अरे, मैंने तो तुम्हारी जान बचाई है भोला ने शेर को समझाया।

शेर बोला, “मैं तो भाग-भाग कर थक गया हूँ। अब तुम्हें ही खा कर अपनी भूख मिटाऊंगा।”

बेचारा भोला डर के मारे थर-थर कांपने लगा। वहीं एक खरगोश घास चर रहा था। उसने उन दोनों से पूछा कि क्या बात हो गई। तब भोला ने रोते हुए बताया, “मैंने अभी इस शेर को जंगली कुत्तों के झुंड से बचाया है और अब यह मुझे ही खाना चाहता है।”

शेर और खरगोश की कहानी- पढने के लिए क्लिक करें |

“इसमें मैं क्या कर सकता हूं; भूख लग रही है, तो खाना ही पड़ेगा,”

शेर ने अपनी सफाई दी।

“शायद मैं कोई निपटारा कर सकता हूं। तुम जा कर मेरे लिए ‘भाग जा – यहां से’ पेड़ की टहनी ले आओ। मैं अभी फैसला कर देता हूं,” खरगोश ने भोला से कहा।

खरगोश चाहता था कि भोला इस बहाने से भाग जाए, लेकिन वह तो बिल्कुल मूर्ख निकला। दो मिनट बाद ही हाथ में एक टहनी ले कर वापस आ गया और बोला, “भाग जा यहां से’ पेड़ का तो पता नहीं चला। वे दूसरे पेड़ की टहनी ले आया हूं। अब क्या करना है?”

“मुझे ‘भाग जा यहां से’ पेड़ की टहनी चाहिए। यह वह टहनी नहीं है, यह कह कर खरगोश ने भोला को दोबारा मौका दिया। भोला फिर एक दूस टहनी ले आया। खरगोश समझ गया कि भोला के बस की कोई बात नहीं है। इस बार वह शेर के कान में बोला, “यह आदमी मूर्ख है। मैं ही इसके साथ जा कर टहनी ले आता हूं। फिर फैसला आसानी से हो जाएगा।”

इस पर भोला ने कहा, “मेरी तो समझ में नहीं आ रहा है कि ऐसा कौन-सा पेड़ होता है। फैसला करने के लिए टहनी की क्या जरूरत है। ऐसे ही बता दो। बार-बार मुझे भेज कर थका रहे हो।”

यह सुनकर खरगोश ने अपना माथा पीट लिया। वह सोचने लगा, ‘कैसे मूर्ख व्यक्ति से पाला पड़ गया है। जान बचाने का मौका मिलने पर भी यह उसका फायदा नहीं उठा पा रहा है।’ इधर शेर भी कम मूर्ख नहीं था। उसने उन्हें जाने की इजाजत दे दी। वे दोनों वहां से चले गए और फिर वापस नहीं आए। अगर आप जंगल में जाएं, तो आज भी पेड़ के नीचे बैठे शेर को उस भागे हुए व्यक्ति और खरगोश का इंतजार करते देख सकते हैं।

सोने का चूहा | Hindi story with Moral |

Moral story in hindi

Hindi morals story : Golden mouse – सोने का चूहा | Hindi moral stories

सोने का चूहा | Hindi story with Moral|

एक बार एक अमीर व्यापारी अपने आलसी बेटे को डांट रहा था। मैंने तुम्हे व्यवसाय शुरू करने के लिए इतना पैसा दिया है और तुमने कुछ भी नहीं कमाया है।तुम किसी भी काम में अच्छे नही हो | इस मरे हुए चूहे को देखो। एक काबिल व्यक्ति इस तरह की बेकार चीज से भी व्यवसाय शुरू कर सकता है!
सोमदत्त, जो एक गरीब अनाथ बालक था, ने उसकी बातें सुनीं। वह अंदर गया और व्यापारी से अनुरोध किया,

“कृपया मुझे इस चूहे को पूंजी के रूप में उधार दें और मैं अपनी किस्मत आजमाउंगा।

“व्यापारी हँसा। लेकिन फिर भी, उसने सोमदत्त को चूहा दिया और रसीद ली जो सोमदत्त ने उसे लिखी थी।

मरे चूहे को सोने का चूहा बनाने का सफ़र ( Hindi story )

सोमदत्त अपने हाथ में मरे हुए चूहे के साथ चल रहा था, जब एक और दुकानदार ने उसे बुलाया, “यहाँ आओ, लड़के। मुझे अपनी बिल्ली को खिलाने के लिए चूहे की जरूरत है। मैं आपको इसके लिए मुट्ठी भर चना दूंगा।”

सोमदत्त ने चूहा दे दिया और मुट्ठी भर चना ले लिया ।”घर पर सोमदत्त ने चने को अच्छे से भून लिया। और वह पानी का घड़ा लेकर अपने चने और पानी लेकर चौराहे पर खड़ा हो गया। उसने काफी देर तक ग्राहंक का इंतजार किया।

शाम को जब मजदूर लकड़ी काट कर लौट रहे थे तो उन्होंने बालक को भुने चने और पानी के साथ देखा। सोमदत्त ने विनम्रता से उन्हें चना और पानी दिया।मजदूर बोले लेकिन हमारे पास पैसा नहीं है। हम केवल लकड़ी की दो छड़ें ही दे सकते हैं!”( बिल्ली की कहानी )

चूहे की कहानी

चने से किया लकड़ी का व्यापार

सोमदत्त ने सोचा इस साधारण चने के लिए यह एक अच्छा भुगतान है। सोमदत्त ने प्रत्येक मजदूर से दो-दो डंडे लेकर लकड़ियों की एक छोटी सी गठरी इकट्ठी की। वह बंडल को बाजार में ले गया, उसे बेच दिया और उसके साथ कुछ और चना खरीदा।सोमदत्त ऐसा प्रतिदिन करता था। वह मजदूरों के बीच एक अच्छे लड़के के रूप में प्रसिद्ध हो गया, जो सिर्फ एक-दो लकड़ी के लिए स्वादिष्ट चना और ताज़ा पानी देता है ।

उनमें से बहुत से लोग जंगल से लौटते समय प्रतिदिन उसका चना खरीदने लगे। सोमेदत्त को हर दिन लकडियो के कई बंडल मिलते थे। क्योंकि अब उसके पास इतने सारे ग्राहक थे |

30 Birds name in Hindi & English with picturesक्लिक करें

एक बार, जब सोमदत्त बाजार में लाठी बेच रहा था, तो उसकी मुलाकात एक कुम्हार से हुई। कुम्हार को अपनी भट्टी में जलाने के लिए लकड़ी की जरूरत थी। कुम्हार ने लकड़ी के बदले में, सोमदत्त को उसके चने बेचने के लिए बर्तन और पानी के लिए कुछ घड़े दिए। ( हाथी की कहानी )

अपनी दुकान की शुरुआत (Moral story in Hindi)

सोमदत्त ने एक भी पैसा बर्बाद नहीं किया। उसने सुबह लकड़ी और शाम को चना बेचने के लिए कड़ी मेहनत की। एक दिन, उसके पास इतना पैसा आ गया कि वह मजदूरों से सारी लकड़ी खरीद सके। उसने उन लकडियो को बाजार में अच्छी कीमत पर बेच दिया। कुछ समय बाद उसने बाजार में अपनी दुकान भी खोल ली।

चिड़िया की 2 अनमोल बातें – क्लीक करें

वह अपने ग्राहकों के प्रति हमेशा विनम्र रहता था । उनमें से कुछ ने उसे नकद भुगतान किया जबकि अन्य ग्राहकों ने उसे तरह का भुगतान किया कि जो भी वस्तुएँ उनके पास होती थी वे उन्हें लकड़ी खरदीने के बदले में दे देते थे।

सोमदत्त ने हमेशा उन लोगों को वस्तुएँ बेचने का कोई न कोई तरीका ढूंढा जिन्हें उनकी आवश्यकता थी।कुछ वर्षों के बाद, सोमदत्त शहर में एक धनी व्यापारी बन गया। एक दिन उसने सुनार से उसे एक छोटा सुनहरा चूहा बनाने को कहा।

सोने का चूहा (चूहे की कहानी )

वह उस चूहे को अमीर व्यापारी के पास ले गया।मैंने तुमसे कई साल पहले पूंजी के तौर पर एक मरा हुआ चूहा उधार लिया था। आज मैं उसे लौटाने आया हूँ। कृपया इस सुनहरे चूहे को स्वीकार करें|धनी व्यापारी को बड़ा आश्चर्य हुआ।वह सोमदत्त के व्यावसायिक कौशल से इतने प्रभावित हुए कि उन्होंने उन्हें अपनी बेटी की शादी सोमदत्त से कर दी । अच्छाई का इनाम | Hindi Moral story |

इस प्रकार सोमदत्त जो एक गरीब अनाथ लड़का था, उसने अपनी बुद्धि, कड़ी मेहनत और विनम्रता के कारण धन और सम्मान अर्जित किया।


Click here for – Hindi stories for kids

बिल्ली की कहानी |Hindi story for kids |

billi ki kahani

बिल्ली की कहानी |होशियार बिल्ला| Hindi story for kids | Billi kii kahani

गोमा एक बहुत होशियार और चालाक बिल्ला था | वह बड़ा ही सुन्दर था | उसकी एक दोस्त थी जिसका नाम योमी बिल्ली था | दोनों बहुत अच्छे दोस्त थे | एक दिन वह एक पार्क में घूमने के लिए गये | वह पार्क राजकुमारी का था | वह दोनों मस्ती से वहाँ घूम ही रहे थे तभी वहाँ एक बड़ा सा कुत्ता आ गया | योमी कुत्ते को देख कर डर गयी और भाग कर पेड पर चढ़ गयी |

बच्चो के लिए मनोरंजक हिन्दी कहानियां पढने के लिए क्लिक करें

लेकिन गोमा बहादुरी से वही खड़ा रहा | उसने कुत्ते को भगाने की कोशिश की लेकिन कुत्ते ने गोमा को काट लिया | अपने दोस्त गोमा को बचाने के लिए योमी जोर जोर से मियाऊ मियाऊ चिलाने लगी | उसकी आवाज़ सुनकर महल से एक सिपाही दोड़ता हुआ वहां आया और उसने कुत्ते को वहां से भगा दिया |

(गोमा और राजकुमारी की मुलाकात ) {बिल्ली की कहानी }

योमी की आवाज़ सुनकर राजकुमारी भी वहाँ आ गयीं | वह गोमा को गोदी उठा कर अपने महल ले गयीं | योमी बेचारी वही अकेली रह गयी | राजकुमारी बहुत अच्छी थी | वह सबका बहुत ख्याल रखती थी | उन्होंने गोमा का बहुत ख्याल रखा उसको डॉक्टर को दिखाया | कुछ दिन में ही गोमा सही हो गया | लेकिन उसको अपनी दोस्त योमी की याद आती रहती थी|

राजकुमारी के गार्डन में एक सांप रहता था | वह जब सिपाही महल में नही होते थे मौका देख कर राजकुमारी को परेशान करने आ जाता था | एक दिन जब राजकुमारी गिटार बजा रही थी सांप राजकुमारी के पास आ गया | गोमा बिल्ला भी वही बैठा था | उसने देखा सांप राजकुमारी के पास जा रहा है उसने तेज़ी से उछल कर सांप की गर्दन परवार किया और सांप को मार दिया |

Akbar Birbal Moral Stories in Hindi– पढने के लिए क्लिक करें

सांप को मरा देख कर राजकुमारी बहुत खुश हुई | उन्होंने गोमा का शुक्रिया अदा किया | अब वह गोमा को और पसंद करने लगी | गोमा राजकुमारी का सबसे प्यारा पालतू जानवर बन गया| अब गोमा की महल में और अच्छी खातिरदारी होने लगी| लेकिन इतना सब कुछ होते हुए भी गोमा उदास रहता था उसे अपनी दोस्त योमी की याद आती थी |

गोमा और योमी की मुलाकात (Billi ki kahani )

एक दिन गोमा बगीचे में बैठा था | तभी उसकी नज़र दूर बगीचे में गयी जहाँ एक बड़ी जंगली बिल्ली एक छोटी मासूम बिल्ली को परेशान कर रही थी | गोमा तुरंत उस छोटी बिल्ली की मदद करने के लिए वहाँ पहुंच गया | उसने सेनिको की मदद से उस जंगली बिल्ली को दूर भगा दिया | छोटी बिल्ली डर कर झाड़ियो में छुप गयी थी | जब वह बाहर आई तो गोमा की नज़र उस पर पड़ी | वह बिल्ली कोई और नही योमी थी | दोनों एक दुसरे से मिल कर बहुत खुश हुए |

बिल्ली की कहानी | बच्चो के लिए हिन्दी कहानियां |

गोमा तिनु को राजकुमारी से मिलवाने अपने साथ महल में ले गया | गोमा की ख़ुशी देख कर राजकुमारी समझ गयी यह गोमा की अच्छी दोस्त है | उन्होंने यामी को भी महल में रख लिया | तीनो हँसी ख़ुशी साथ में रहने लगे |

छोटे बच्चो के लिए दिलचस्प बिल्ली की कहानी केसे बिल्ली जंगल छोड़ कर हमारे साथ रहती है क्लिक करें

तोते की कहानी| Hindi story for kids |

तोते की कहानी Hindi story for kids

तोते की कहानी | गप्पी तोता | Hindi story for kids |

एक बार एक जंगल में एक तोता रहता था जिसका नाम था मिट्ठू । मिट्ठू बात को बढ़ा चड्ढा कर कहने की बुरी आदत थी।
एक दिन मिठू मैना से बोला: पता है तुम्हें, आज मैंने क्या खाया? सच मैं बहुत बढ़िया दावत थी | बहुत सारी मिठाईयां और बहुत सारा खाना | बहुत बड़ी पार्टी थी वो..
मैना बोली : सच में ? कहां पार्टी मिली तुम्हें?
तोता बोला: एक बहुत अमीर आदमी के घर पर, मैंने बताया था ना वो बहुत अच्छा है मुझे महेंगे तोहफे देता है।
तबी वहाँ एक कोवा आया, कोवा बोला: इतना मत फेंको मिट्ठू इस मैना को बेवकूफ मत बनानाओ मैंने तुम्हें सुबह ही सूखी मिर्ची खाते हुए देखा था | तुम इसी पेड़ पर बैठा कर मिर्ची खा रहे थे.

तोते की कहानी  Hindi story for kids
तोते की कहानी | Hindi story for kids |

मिट्ठू तोते की डींगे (hindi story for kids )

मिट्ठू तोता बोला: मेरे पास तुम जैसा के लिए वक्त नहीं है,मझे एक और दावत के लिए जाना है । में चलता हूं कह कर मिट्ठू उड़ गया।
कोवा चिड कर मैना से बोला हुह उसकी बात मत सुनो । वो झूठा है। मैना सर हिलाते हुए हामी भारती है हम्मम्म ब्लैकी तुम सही बोल रहे हो वे झूठा है।
मिट्ठू खुद को नहीं बदला चाहता था | वह दिन पर दिन और गप्प मारने लगा।
जब वे आसमान में उड़ रहा था तब उसे एक गाय दिखाई दी मिट्ठू ने सोचा क्यो न इसे भी अपनी बड़ी बड़ी बातो से बहकाया जाए |

वह गाय के पास जकर बोला , पता है “एक बार मैं चील से भी ऊंचा उड़ा था” , फिर लोमड़ी के पास गया और बोला , शेर मुझे प्रधान मंत्री बनाना चाहता है पर मैंने माना कर दिया | फिर हाथी से जकर बोला मेरे पास बहुत सारा खजाना भरा पड़ा है मैं चाहूँ तो पुरा जंगल खरीद सकता हूं । मोर से बोला, कोयल ने मुझे कहा है की मैं उससे भी मीठा बोलता हूं। ऐसे ही मिट्ठू तोता सभी जनवारो के पास जाता और डींगे मारता था |

( गप्पी तोते की कहानी )

एक दिन एक कबूतर उस जंगल में आया | उस्को देखकर मैना बोली, ओह्ह्ह तुम कितने सुंदर पक्षी हो |

कोन हो तुम ? कबूतर बोला शुक्रिया, मैं कबूतर हूं | मैं कुछ ढूंड रहा हूं | तभी वहां पर कोवा और कोयल भी आ गई | मैना बोली कव्वे भैया ,कोयल, देखो हमारे यहां कोन आया है ।

कितना सुन्दर मेहमान है | है ना ?
कव्वा बोला: कितना प्यारा पक्ष है | कोयल भी बोली कितना सुंदर दिखता है यह ।
कव्वा बोला यह तो शाही पक्षी लगता है|
तबी मिट्ठू भी वहां आ गया | मिठू बोला यह कौन है?

बिल्ली की कहानीक्लीक करें

( Totay ki kahani)

कबूतर बोला: तुम मिट्ठू हो ना?
मिट्ठू चिल्ला कर बोला , हां मैं ही मिट्ठू हूं । मिट्ठू खुश होकर बोला ,क्या तुमने मेरे बारे मैं सुना है?
कबूतर बोला , हां दरअसल ….
मिट्ठू कबूतर को बीच में ही रोक कर बोला: देखा तुम लोगो ने मेरा कितना नाम है | बाहर वालों ने भी मेरे बारे में सुना है।
मिट्ठू फिर से बोला, कबूतर जानते हो मैं बहुत सारे देश घूम चुका हूं।
कबूतर बोला, हां लेकिन…
मिट्ठू फिर से बीच में बोला और मुझे तो ब्यूटी प्राइज भी मिला था।
कबूतर बोला…अच्छी बात है…मेरी बात तो….
मिट्ठू फिर से उसकी बात बीच में ही काटता हुआ बोला, मैं बहुत ही अमीर पक्षी हूँ, मालूम है?
इस जंगल में सबसे अमीर ।

तोते की कहानी | हिन्दी कहानी |

कबूतर बोला, तुम मेरी बात सुनो तो मैं कुछ कहना चाहता हूं | तभी उस पेड के नीचे जहां वे सारे पाक्षी बैठे थे शेर की आवाज आई | शेर गुर्रा कर बोला, ये सही नहीं है। इसके पास पहले से ही सब कुछ है ।
मिट्ठू तोता शेर की बात सुन कर बोला, शेर क्या कहना चाहते हैं।

बच्चो के लिए educational websiteक्लिक करें


कबूतर बोला, यहि मैं तुम कबसे बताने की कोशिश कर रहा हूं। मगर तुम तो डींगे ही मरते जा रहे हैं। वे आगे बोला, मैं शाही नोकर हूँ | शेर राजा का सन्देश लेकर तुम्हारे पास आया था राजा चाहते हैं की तुम उनके महल मैं आओ । तुम्हे खाना, महल मैं रहना सब कुछ मिलेगा | मगर अब राजा ने तुम्हारी बात सुन कर अपना मन बदल लिया है | क्योकी तुम तो पहले ही बहुत अमीर हो ?


मिट्ठू हड़बड़ा कर बोला: पर मेरे पास कुछ नहीं है ।
कबूतर बोला, अब जाने भी दो । ये कहकर वो चला गया।
ये सुनकर कोवा बहुत ज़ोर से हंसा, उसे देखकर बाकी पाक्षी भी हसने लगे।
कौवा बोला , जो डींगे मारते हैं उसके साथ ऐसा ही होता है हाहाहा बहुत अच्छा हंसने लगा।
बेचारा मिट्ठू दुखी होकर वहां से उड़ता हुआ चला गया।

बच्चो के लिए मनोरंजक हिन्दी कहानियाँ – पढने के लिए क्लीक करें

Kids Stories In Hindi – कौवे की कहानी

कौवे की कहानी | मोनु के घर के सामने एक बड़ा सा आम का पेड़ था। जिसमें एक कौवे का जोड़ा रहता था। जिनका नाम चिंटू-मिन्टू था।

एक दिन बड़ी तेज आंधी आयी और उनका हौसला गिर गया। दोनों ही बहुत उदास हो गए। चिंटू ने मिन्टू से कहा, “अब क्या करें जब तक घोसला बन नहीं जाता तब तक हम क्या करेंगे?”

मिन्टू ने कहा देखो इस घर की मालकिन ने झाड़ू बाहर ही रखा हुआ है। तुम इससे तिनका निकालकर घोंसला बनाओ मैं कहीं पास से सूखी घास ही ले आती हूं। अगर हम मिलकर घोंसला बनाएंगे तो घोंसला आज ही बन जाएगा।

चिंटू ने कहा, “ठीक है।“ और दोनों काम पर लग गए। दोनों ने मिलकर के घोंसला बनाया। अगले दिन मोनु की मम्मी ने आम के पेड़ के नीचे लौकी की बेल लगा दी।

कोव्वे की कहानी

2 महीने बाद लौकी की यह बेल आम के पेड़ के ऊपर पहुँच गयी। वो बेल लगातार बढ़ती रहती थी। बेल में लौकी भी लगने लग गई थी।

एक दिन मोनु की मम्मी आम के पेड़ पर लगी हुई बेल से लौकी तोड़ रही थी। चिंटू ने सोचा यह महिला मेरे हौसले को नुकसान पहुंचाना चाहती है। तो चिंटू कांव-कांव करने लगा । चिंटू की कांव-कांव सुनकर मिन्टू भी आ गयी।

मिन्टू ने चिंटू से पूछा की क्या हुआ तुम इतने घबराये हुये क्यों दिखाई दे रहे हो। चिंटू ने बताया की ये महिला सायद हमारे घोंसले को नुकसान पहुचाना चाहती है। मिन्टू ने कहा, “तब तो हमे अब सतर्क रहना पड़ेगा।“

चिंटू बोला, “लेकिन मैं अब इस महिला को नहीं छोड़ूँगा। हमने इसके झाड़ू से अपना घोंसला बनाया है। सायद तब ये पेड़ पर चड रही थी।“  

उस दिन से जब भी वह महिला घर से बाहर आती तो चिंटू उड़कर आता ओर उसके सिर में अपनी चोंच से मारता था। महिला को समझ नहीं आता था कि कव्वा ऐसा क्यों कर रहा है। 

अगले दिन मिन्टू ने अपने घोंसले में अंडे दिए। मिन्टू ने सोचा की जब चिंटू घर आएगा तो वो अंडे देखकर बहुत खुस होगा। लेकिन चिंटू जब घर आया तो वह खुश होने के बजाय उदाश हो गया। मिन्टू ने चिंटू से उसकी उदासी का कारण पूछा। तो चिंटू ने कहा की मुझे इस बात का डर है कहीं वह महिला हमारे बच्चों को नुकसान ना पहुचाये।

Hindi story for kids

शाम को मोनु की मम्मी लौकी तोड़ने को पेड़ पर चड़ी और जो लौकी सबसे ऊपर लटक रही थी उसे तोड़ लाई।  चिंटू ने देख लिया कि महिला लौकी तोड़ रही है पर उसे लगा कि कहीं महिला उनका घोंसला ना तोड़ दे। तो उसने महिला के सर में मानना शुरू कर दिया। मोनु की मम्मी को कुछ समझ नहीं आया की वो ऐसा क्यों कर रहा है।  

एक दिन मोनु आम के पेड़ के नीचे ही बैठा था। एक सांप पेड़ पर चढ़ रहा था। मोनु पेड़ के ओर पीठ करके बैठा था। तो उसे पता नहीं चला की साँप पेड़ मे चढ़ने की कोसिस कर रहा है। लेकिन चिंटू कौवे ने साँप को पेड़ मे चढ़ते देख लिया था।

चिंटू के अंडों से अभी बच्चे बाहर भी नहीं निकले थे । चिंटू समझ गया था की साँप उसके अंडों को खाने के लिए ही पेड़ में चढ़ रहा है। उसने शोर करना शुरू कर दिया। शोर सुनकर पास मे दाना चुगने गयी मिन्टू फटाफट चिंटू के पास आ गयी।

kavve ki kahani

साँप को देख कर मिन्टू भी बहुत डर गयी। दोनों ने शोर करना सुरू कर दिया। दोनों की कांव-कांव सुनकर आसपास के सभी कौवे अपने झुंड के साथ आ गए । लेकिन साँप को देखकर किसी की हिम्मत पेड़ के पास जाने की नहीं हो पायी।

अब सभी कौवे शोर करने लगे। इतना ज्यादा शोर सुनकर मोनु का ध्यान कौवों के ऊपर गया । उसने सोचा की ये कौवे क्यों इतना कांव-कांव कर रहे हैं । जैसे ही मोनु ने पीछे देखा तो उसने साँप को पेड़ मे चढ़ते देखा। मोनु ने अपनी मम्मी के साथ मिलकर उस साँप को भागा दिया।

साँप के भाग जाने पर मिन्टू चिंटू को सांस मे सांस आई। उन्होने सभी कौवों का धन्यवाद किया। अब मोनु को पता चल गया था की इस पेड़ मे कौवे रहते हैं। मोनु कुछ भी खाता तो वह मिन्टू और चिंटू के लिए रोज घर के बाहर कुछ ना कुछ रख देता था।

Baccho ke liye hindi kahani-कौवे की कहानी

एक दिन मिन्टू ने देखा एक नेवला उनके घोंसले की तरफ बढ़ रहा था। उसके बच्चे अभी अभी अंडों से बाहर आए थे। वह जोर-जोर से कांव-कांव करने लगी ताकि कोई उसकी आवाज सुन ले।

दिन का समय था कोई भी बाहर नहीं था। मिन्टू उड़ के मोनु के कमरे के बाहर पहुंची और कांव-कांव करने लगी।

मोनु अपने कमरे में पढ़ रहा था। मोनु का सारा ध्यान अपनी पड़ाई में था। इसलिए उसने मिन्टू को नहीं देखा।  तभी मिन्टू उसकी खिड़की में अपनी चौक से टकटक मारने लगी।

मिन्टू को मोनु ने देख लिया और उसको लगा कि आज दोपहर में मिन्टू को क्या हो गया है जो यहां खिड़की में मार रही है। मोनु मिन्टू के पीछे गया तो उसने देखा एक नेवला पेड़ में चढ़ रहा है।

मोनु ने फटाफट से लकड़ी उठाई और नेवले को पेड़ से नीचे गिरा दिया। फिर नेवला भागने लगा तो मोनु ने उसे बहुत दूर तक भगाने के लिए उसका पीछा किया और नेवले को दूर तक भगा दिया। अब चिंटू- मिन्टू को समझ आ गया की मोनु ओर उसकी मम्मी से उन्हें कोई नुकसान नहीं है। अब चिंटू ने भी मोनु की मम्मी को परेशान करना बंद कर दिया। फिर सब खुशी-खुशी रहने लगे।

बच्चो के लिए मनोरंजक हिन्दी कहानियांक्लिक करें

लकड़हारे की कहानी- Lakadhare Ki Kahani

लकड़हारे की कहानी | दूर एक गाँव में एक लकड़हारा रहता था । जो लकड़ियाँ बेचकर ही अपना पेट पालता था। लकडहारे के पास एक अनौखी शक्ति थी । वो जो भी सपना देखता वो हमेशा सच हो जाता । उसने अपनी इस शक्ति के बारे मे सब से छुपा कर रखा था ।

एक रात उसने सपना देखा की जहां वो लकड़ी बेचने जाता है वहाँ भुकंप आ गया है और सारे लोग डर के मारे इधर-उधर भाग रहे हैं।

रोज की तरह लकड़हारा जब सुबह लकड़ी काटने गया तो एक आदमी ने उस से कहा , “भाई तुम जहां लकड़ी बेचने जाते हो आज सुबह-सुबह वहाँ भुकंप आया और लोगों में हड़कंप मच गया । तूम आज वहाँ मत जाना ।”

उसके ऐसा बोलने पर लकड़हारे को वो सपना याद आ गया जो उसने पिछली रात को देखा था । लकड़हारा  उसे अपने सपने के बारे में बिना कुछ भी बताए अपने घर चला गया ।

अगली रात उस लकड़हारे ने फिर एक सपना देखा । इस बार सपने में परी लोक की महारानी के गले का हार चोरी हो गया है। अगली सुबह जब लकड़हारा लकड़ियाँ काटने जाने लगा तो रास्ते में उसे एक आदमी मिला, जिसने उससे किसी योग्य लकड़हारे का पता पूछा ।

लकड़हारे ने कहा ,”मैं भी एक लकड़हारा ही हूँ बताओ क्या काम है?”

“मैं परीलोक का सेनापति हूँ  परी लोक के राजा को एक लकड़हारे की जरूरत है, क्या तुम मेरे साथ परी लोक चलोगे। ” सेनापति ने कहा ।

Lakadhare Ki Kahani

लकड़हारे को काम की जरूरत थी तो वो परी लोक जाने को राजी हो गया ।

लकड़हारा  जैसे ही राजमहल के बड़े से दरवाजे के पास पहुंचा, तो देखा की महल में शोर हो रहा है, लकड़हारा ने पहरेदार से शोर का कारण पूछा ,पहरेदार ने  लकड़हारे को बताया की कल रात महारानी का हार चोरी हो गया है।

 उसी रात लकड़हारे ने सपने में महारानी की दासी को देखा । सपने में दासी अपने पति को उस हार को दूर शहर में बेच आने को कह रही है । जब लकड़हारे की नींद खुली, तो वो तुरंत राजा के महल में गया और राजा को बताया की आपके दास-दासियों ने ही हार चुराया है।

राजा ने राजमहल के सभी दास और दासियों को बुलाया । जैसे ही लकड़हारे ने उस दासी को देखा जो उसके सपने में आई थी तो वो उसे पहचान गया । उसने राजा को बताया की ये दासी ओर इसका पति चोर है। अपने ऊपर आरोप लगता देख  वो दासी रोने लग गयी ।

दासी को रोता देख रानी को उसपर दया आ गयी । रानी ने गुस्से से कहा, “तुम्हारी हिम्मत कैसे हुयी मेरी खास दासी पर आरोप लगाने की, ये आदमी झुठा है इसे अभी कारागार में बंद कर दिया जाय । लकड़हारा डर गया और रानी से कहने लगा,

बच्चो के लिए हिन्दी कहानी

” महारानी आपके इसी भरोसे का इस दासी और इसके पति ने गलत फायदा उठाया है। “

राजा व रानी ने लकड़हरे की बात पे भरोसा न करते हुये उसे कारागार में बंद कर दिया।

लकड़हारा अपने साथ अन्याय होता देख खुद से कहने लगा, भलाई करने गया था क्या से क्या हो गया ।

कारागार के बाहर उसे वही सेनापति मिला । सेनापति ने कहा, “अगर तुम सच्चे हो तो मैं तुम्हारी मदद कर सकता हूँ ।”

“सेनापति जी मैं निर्दोष हूँ, मेरी मदद करो ।” लकड़हरे ने कहा ।

सेनापति ने उसे परी लोक की देवी के बारे में बताया, वो सिर्फ सच्चे इन्सानों की मदद करती है, “अगर तुम सच्चे होगे तो वो जरूर  तुम्हारी मदद को आएगी।” सेनापति ने कहा ।

Lakadhare Ki Kahani– लकड़हारे की कहानी

लकड़हारा आंखे बंद करके परी को याद करने लगा। कुछ ही देर में उसके सामने एक सुंदर सी परी काले कपड़े पहने खड़ी थी । परी के हाथ में एक झाड़ू था ।

“तुम कोन  हो, तुमने मुझे क्यों याद किया।” परी ने लकड़हारे से कहा । लकड़हारे ने परी को सारी बात सुनाई की कैसे वो परी लोक में फस गया । परी ने कहा ,” की मैं तुम्हें ये एक जादुई झाड़ू देती  हूँ। बाकी तुम अपना दिमाग लगाओ की राजा के सामने तुम कैसे असली चोर को पकडवाओगे।” ऐसा कह कर परी गायब हो गयी ।

अब लकड़हारे के पास परी का जादुई झाडू था । ये परी का जादुई झाडू ही अब उसकी कुछ मदद कर सकता था ।       

 सेनापति  ने लकड़हारे से कहा , “सारे चोर रात के अंधेरे में ही चोरी का माल दूसरे राज्य में ले जाते हैं , मेरे पास एक उपाय है । अब हमारे पास परी का जादुई झाडू है जिस की मदद से हम दोनों इसमे बैठ कर उस चोर को पकड़ सकते हैं ।”

Hindi Story For Kidsलकड़हारे की कहानी

वो दोनों झाड़ू में बैठ कर आकाश में उड़ गये , और महल के चारो ओर नजर रखने लगे । लेकिन उस रात उन्हें  कोई भी चोर नहीं मिला ।

अगली रात को वो दोनों चोर को ढूंढने के लिए फिर से उस जादुई झाड़ू में बेठ कर उड़ गए । तभी उनको एक आदमी दिखाई दिया । जो हाथ मे गठरी लिए अंधेरे में  छुप- छुप कर महल के बाहर जा रहा था । दोनों ने बहुत दूर तक उसका पीछा किया , पीछा करते-करते सवेरा हो गया ।

सुबह होते ही लकड़हारे ने उस चोर को पहचान लिया । और सेनापति  को बताया की ये तो वही चोर है जिसने चोरी की है। सेनापति ने उस चोर को दबोच लिया और जादुई झाड़ू में बैठा कर सीधे राजमहल मे पहुच गये ।

फलो के नाम – क्लिक करें

 जब परी का जादुई झाडू लोगों ने देखा तो राज दरबार के सभी लोग हैरान हो गए । सबको यकीन हो गया की लकड़हारा सच्चा है, क्योंकि परी का जादुई झाडू सिर्फ एक सच्चा  इंसान ही प्राप्त कर सकता था । (birds name )

जब गठरी को खोला गया तो उसमे रानी का हार मिला । राजा ने दासी ओर उसके पति को कारागार में डालने के आदेश दिये। राजा ने लकड़हारे की सच्चाई से खुश हो कर उसे राज्य का विशेष सलाहकार बना दिया ।

बच्चो के लिए मनोरंजक हिन्दी कहानियाँक्लिक करें

Kids Stories in Hindi – कबूतर की कहानी

कबूतर की कहानी | गांव में राजू नाम का एक लड़का रहता था। वह बहुत शांत रहने वाला बच्चा था। उसको दोस्त बनाना बहुत अच्छा लगता था। पर असल जिंदगी में उसका कोई दोस्त नहीं था।

स्कूल में भी कोई उससे बात नहीं किया करता था। जब वह स्कूल जाता तो बच्चे उसका मजाक बनाते थे और कहते थे कि राजू का कोई दोस्त ही नहीं है। राजू घर जाकर अपनी मम्मी को सारी बातें बताता था।

राजू हमेशा उदास ही रहा करता था। उसकी मम्मी ने एक दिन राजू से कहा, “देखो बेटा राजू तुम परेशान मत हुआ करो, तुम्हारे दोस्त पक्का बन जाएंगे। तुम अपना टिफिन अपने क्लास के बच्चों के साथ बांटो तो तुम्हारे दोस्त खुद बन जाएंगे।“

मम्मी की बात सुनकर राजू खुश हो गया की अब वह कल स्कूल जाएगा और अपना टिफ़िन अपने सहपाठियों के साथ बांटकर खाएगा। जिससे उसके भी बहुत सारे दोस्त बन जाएंगे।  

बिल्ली की होशियारी क्लिक करें

राजू ने अगले दिन सुबह अपनी मम्मी से टिफिन में ज्यादा खाना डालने को कहा। राजू स्कूल गया जैसे ही लंचटाइम हुआ, राजू के पास कोई बैठा ही नहीं। सब बच्चे अपने अपने दोस्तों के साथ चल दिए।

राजू उठा और बाहर चला गया। राजू ने थोड़ा सा ही खाना खाया। राजू बहुत उदास हुआ कि उसका कोई दोस्त नहीं बनेगा।

बच्चो के लिए हिन्दी कहानी -कबूतर की कहानी

अचानक उसे आसमान में कबूतर दिखाई दिया। जो उड़कर स्कूल की दीवार पर बैठ गया। राजू ने अपने टिफिन से रोटी निकाली और उसके छोटे-छोटे टुकड़े कर दिए। रोटी के टुकड़े राजू ने कबूतर के सामने फेंक दिए।

कबूतर पहले तो डर रहे थे। उन्होने देखा राजू कितने प्यार से रोटी को तोड़कर उनके लिए डाल रहा था। कुछ देर बाद एक कबूतर ने चुपके से एक रोटी का टुकड़ा उठा लिया। उसको देख के फिर सारे कबूतरों ने रोटी खाई।

रोज-रोज राजू यही करता। वह स्कूल जाता और घर से कबूतर के लिए भी खाना लाया करता। राजू और कबूतरों में बहुत अच्छी दोस्ती हो गई।

एक बार राजू को आसमान में उड़ती हुई चिड़िया दिखाई दी, जो बहुत तेज उड़ रही थी। राजू उसे देखता रहा। जब वह चिड़िया थक गई तो वह पेड़ पर बैठ गई।

उसने अपने मुंह में अपना बच्चा दबा रखा था। राजू हैरान हो गया और उसने अपने दोस्त कबूतरों को बुलाकर यह सब बात बताई।

उनमें से एक कबूतर उड़ कर चिड़िया से सारा हाल पूछने के लिए चल दिया। जब कबूतर राजू के पास आया तो उसने राजू को बताया कि चिड़िया का बच्चा चिड़िया से बहुत जिद करता है कि उसे भी देखना है कि उड़ते हुए कैसा लगता है।

Kabootar Ki Kahani

बच्चा चिड़िया को बहुत परेशान किया करता है। ना वह चिड़िया का लाया हुआ खाना खाता है ना ही उससे प्यार से बात करता है। सिर्फ अपनी ज़िद पर ही अटके रहता है। जिस कारण बेचारी चिड़िया उसे मुंह में दबाकर ही घूमती है।

राजू ने सोचा चिड़िया का बच्चा तो बड़ा जिद्दी है। राजू ने कबूतर से कहा की जाओ चिड़िया को यहां बुला लाओ। मेरे पास एक युक्ति है।

कबूतर चिड़िया को बुलाने उड़ गया। शाम को चिड़िया और कबूतर राजू से मिले राजू ने युक्ति सभी को बताई। सबको राजू की योजना पसंद आई।

युक्ति के तहत उसी शाम चिड़िया अपने बच्चे को मुंह में दबाए उड़ रही थी। वह उड़ते उड़ते एक नदी के किनारे पहुंचने ही वाली थी कि उसके मुंह में दबा उसका बच्चा मुंह से छूट गया।

और नदी में बैठे मगरमच्छ की पीठ पर जा गिरा। मगरमच्छ सोया हुआ था। उसे कुछ भी पता नहीं चल पाया क्योंकि वह बच्चा बहुत ही छोटा था।

पर गिरते ही वह जोर जोर से रोने लगा। इस वजह से मगरमच्छ की नींद खुल गई। मगरमच्छ ने सोचा आज कुछ तो खाने को मिलेगा। वह हिलने लगा ताकि बच्चा पानी मे गिर जाय।

कबूतर की कहानी – हिन्दी कहानी

चिड़िया का बच्चा और डर गया। इतने में राजू मगरमच्छ के सामने आकर कुछ दूरी बना कर खड़ा हो गया। मगरमच्छ ने कहा, “वाह! कितना बढ़िया दिन है ।आज तो दिन में ही शिकार मिल गया रात को काम नहीं करना पड़ेगा।“

मगरमच्छ अपने ऊपर गिरे चिड़िया के बच्चे को भूल कर राजू की तरफ तेजी से बढ़ने लगा। जैसे ही मगरमच्छ पानी से बाहर आया, तो ऊपर से चिड़िया ने आकर अपने बच्चे को उसकी पीठ से झटपट उठा लिया।

मगरमच्छ राजू का शिकार करना चाहता था। वह राजू के पास पहुंचने ही वाला था कि कबूतरों का बड़ा झुंड वहां अपने मुंह में पत्थर भरकर पहुंच गया। कबूतरों ने अपने मुंह से पत्थरों को मगरमच्छ पर फेंकना शुरू कर दिया।

इतने में मौका देख कर राजू वहां से भाग निकला। चिड़िया अपने बच्चे को घोसले में ले गई। वह बहुत डरा हुआ था। चिड़िया ने अपने बच्चे को समझाया की बच्चों को हमेसा बड़ों का कहना मानना चाहिए।

बड़ों का कहना न मानने से मुसीबत का सामना करना पड सकता है । अब उसे अपनी गलती समझ में आ गई थी कि ऐसे उड़ना उसके लिए जोखिम भरा है। चिड़िया के बच्चे ने कहा की आज से वो जिद नहीं करेगा । ओर हमेसा अपनी मम्मी का कहना मानेगा। 

चिड़िया राजू के पास आई और बोली तुम्हारी युक्ति काम कर गई मेरा बच्चा अब जब तक खुद उड़ना नहीं सीख जाए तब तक वह घोसले में ही रहेगा। राजू और उसके बहुत सारे कबूतर दोस्तों को बहुत खुशी हुई।

अब राजू को उसके बहुत सारे दोस्त मिल चुके थे। कबूतरों और चिड़िया से राजू की दोस्ती देखकर स्कूल मैं भी उससे सब बच्चे बात करने लगे और बहुत सारे बच्चे राजू के दोस्त बन गए थे।  ( 25 फलो के नाम )

बच्चो के लिए मजेदार हिन्दी कहानियां – क्लिक करें

Kids Stories In Hindi – आलसी गधा और बैल

Kids Stories In Hindi – आलसी गधा और बैल

Kids Stories In Hindi – आलसी गधा और बैल | एक गाँव में एक किसान रहता था। वह जानवरों की भाषा समझ सकता था। हर शाम वह अपने खेत में रुकता था, ताकि वह अपने जानवरों को बातचीत करते हुए सुन सके।

एक शाम उसने अपने एक बैल को एक गधे से अपने काम की शिकायत करते हुए सुना।

बैल बोला, “दोस्त, मैं सुबह से लेकर रात तक हल जोतता हूं, कितना भी गर्म दिन हो, मेरे पैर कितने भी थक गए हो, मेरी गर्दन में कितना भी दर्द हो, मैं काम जरूर करता हूं।

लेकिन तुम आराम करते रहते हो, तुम्हारे तो मजे हैं तुम तो एक रंगीन कंबल में लिपटे रहते हो, मालिक के साथ इधर उधर जाने के अलावा कुछ नहीं करते हो और सारा दिन हरी घास खाते हो।”

यह गधा आलसी होने के बावजूद बैल का एक अच्छा दोस्त था। उसे बैल से सहानुभूति थी।

Moral story in Hindi

गधा बैल से बोला, “मेरे अच्छे दोस्त, तुम बहुत मेहनत करते हो और मैं तुम्हें आराम दिलाना चाहता हूं इसलिए मैं तुम्हें एक उपाय बताता हूँ जिससे तुम आराम कर सको।

सुबह जब किसान का नौकर तुम्हें काम पर ले जाने के लिए आए, तो ऐसे आवाज करना मानो तुम बीमार हो और काम नहीं कर सकते।”

किसान दोनों की बातें सुन रहा था। और उसे गधे के द्वारा दिये गए उपाय का पता चल गया था। बैल ने गधे की सलाह मान ली और अगली सुबह जब नौकर आया तो बैल ने बीमार होने का नाटक किया।

नौकर किसान के पास गया और किसान के पास पहुंच कर बताया कि बैल बीमार है और खेत नहीं जोत सकता है। किसान को तो इस बात का पहले से पता था की बैल आज बहाना करने वाला है।

किसान ने कहा, “बैल बीमार है तो गधे को खेत में ले जाओ और उससे खेत को जोतो।”

Kids Stories In Hindi – आलसी गधा और बैल

नौकर गधे को अपने साथ खेत में ले गया और पूरा दिन उसने गधे से खेत जुतवाया। गधे की मंशा दोस्त की मदद करने की थी। उलटा उसी को अपने दोस्त का काम करना पढ़ गया।

जब रात आई और उसे हल से आजाद किया गया, उसका दिल कड़वाहट सा भर गया था। गधे के पैर थके हुए थे और उसकी गर्दन हल के कारण सूज गई थी।

बैल ने आज दिन भर आराम किया था। वह गधे को देख कर खुशी से बोला, “तुम मेरे अच्छे दोस्त हो, तुम्हारी सलाह के कारण आज मैं 1 दिन आराम कर पाया।”

गधा बहुत थका हुआ था उसने गुस्से से जवाब दिया, “और में अपने दोस्त की मदद करने चला था और उसका काम करने पर मजबूर हो गया।

आज से तुम ही हल जोतना क्योंकि मैंने मालिक को अपने नौकर को यह बोलते सुना है की अगर बैल फिर बीमार हुए तो वह बैल को खाना नहीं देंगे। मैं तो यही चाहता हूं कि वह तुम्हें खाना न दें क्योंकि तुम बहुत ही आलसी हो।”

गधे के मुंह से एसी कड़वी बाते सुन बैल को भी गुस्सा आ गया। इसके बाद दोनों ने एक दूसरे से कभी बात नहीं की। यहां उनकी दोस्ती का अंत हो गया था।

इस कहानी से हमने क्या सीखा:

Moral Stories For Children In Hindi से यह सीख मिलती है  की अगर तुम अपने दोस्त की मदद करना चाहो तो, मदद इस तरीके से करो की दोस्त का भार तुम पर न आए। 

Top10 Short Moral Stories in Hindi 2022क्लिक करें

शेर और हिरन की कहानी- Hindi Story For Kids

शेर और हिरन की कहानी | घने जंगल में सन्नाटा छाया हुआ था। सारे पशु पक्षी सोए हुए थे। बस शिकारी जानवर जैसे भेड़िया, शेर ,लकड़बग्घा आदि जागे हुए थे। शेर शिकार करने के लिए झड़ियों के पीछे घात लगा कर बैठा हुआ था।

शेर और हिरन की कहानी- Hindi Story for kids

उसे हिरन का परिवार दिख गया था। जो अपने झुंड में सो रहा था। हिरन के झुंड को जैसे ही किसी की आहट सुनाई दी हिरन का झुंड भागने लगा। इतने में शेर झड़ियों से बाहर निकाल कर झुंड का पीछा करने लगा।

शेर जैसे ही एक हिरन के पास पहुंचने ही वाला था, वैसे ही हिरन दूसरी तरफ मुड़ गया। इस बार हिरन ने शेर को चकमा देकर अपनी जान बचा ली। हिरन के परिवार को शेर से रोज-रोज जान बचानी पड़ती थी। एक दिन हिरन के परिवार ने फैसला किया कि अब वह इस जंगल को छोड़कर कहीं दूर चले जाएंगे।

एक लकड़बग्घा उनकी सारी बातें सुन रहा था। उसने जाकर यह सारी बात शेर को बता दी। शेर ने एक योजना बनाई और शैतानी हंसी देते हुए लकड़बग्घे से कहा की जब हिरन का परिवार दूसरे जंगल की ओर जाएगा तब वह उन पर हमला करेगा।

शेर और हिरन की कहानी- Hindi Story For Kids

शेर चाहता तो हिरन के परिवार को छोड़ भी सकता था। उसके पास जंगल में बहुत सारे शिकार थे पर शेर हिरन परिवार के पीछे ही पड़ गया था क्योंकि हिरन परिवार के सबसे छोटे हिरन जिसका नाम चीनू था उसने शेर के बेटे की आंख अपने सींघों से फोड़ डाली थी। शेर उसी का बदला लेना चाहता था।

हिरन परिवार ने तय किया कि वह उस जंगल में कल तक भी नहीं रुकेंगे और आज दिन में ही दूसरे जंगल की तरफ निकलेंगे। हिरन परिवार ने दूसरे जंगल के बारे में सुना था कि वहां कोई शेर नहीं है वहां ऐसे जानवर रहते हैं जो शेर के जैसे हिंसक नहीं होते बल्कि बहुत आलसी होते हैं।

Hindi Story For Kids – शेर और हिरन की कहानी-

शेर को पता ही नहीं चल सका कि हिरन का परिवार जंगल छोड़कर चले गया है। शेर रात का इंतजार कर रहा था। पर हिरन का परिवार जंगल छोड़ कर जा चुका था।

शेर गुस्से से बौखला उठा उसने उस लकड़बग्घे को बुलाया और गरजते हुए पूछा की तुम तो कह रहे थे कि हिरन परिवार आज शाम को दूसरे जंगल को जाएगा पर यहां तो कोई है ही नहीं। लकड़बग्घा डर गया और बोला कि मैं अभी पता लगाकर आपको बताता हूं कि हिरन का परिवार कहां है।

लकड़बग्घा जंगल के जानवरों से पूछताछ करने लगा। उसे एक खरगोश मिला जो एक गाजर को कुतर-कुतर कर खा रहा था। उसने खरगोश से पूछा,

“अरे भाई तुमने चीनू को देखा।“ खरगोश बोला की मैं तो आज अपने लिए गाजर को ढूंढने में व्यस्त था। मैंने किसी को नहीं देखा, हां इस पेड़ के ऊपर बंदर रहते हैं हो सकता है उनमें से किसी ने उन्हें देखा हो।“

लकड़बग्घा बंदर की टोली के पास पहुंचा और उसने बंदरों से पूछा, “ तुमने किसी हिरन के परिवार को देखा क्या।“ एक बंदर बोला की हम तो खा पीकर सो जाया करते हैं। दिन में कोई कहीं भी जाए हमें कोई मतलब नहीं होता।“

Sher aur Hiran Ki Kahani

लकड़बग्घा सोचने लगा कि फालतू में शेर और उस हिरन की दुश्मनी में वह बीच में पड़ गया। लकड़बग्घा अब और आगे गया। उसे एक चिड़िया पानी के तालाब के पास मिली।

लकड़बग्घे ने सोचा कि यह चिड़ियां उसके काम आ सकती है तो उसने चिड़िया से कहा,

“बहन मेरा दोस्त मुझे बिना कुछ बताए कहीं चला गया है। मैं उसे सुबह से ढूंढ रहा हूं तुमने उसे देखा क्या?”

चिड़िया बोली, “नहीं मैंने तो किसी को नहीं देखा, कौन है तुम्हारा दोस्त?”

लकड़बग्घा बोला, “मेरे दोस्त का नाम चीनू है वो एक हिरन है, शायद वह पूरे परिवार के साथ कहीं चला गया है। मैं उसे ढूंढ रहा हूं।”

चिड़िया ने कहा, “तुम यहीं पर ठहरो मैं एक बार जाकर आसपास देख आती हूं, फिर मैं तुम्हें बताऊंगी।“

लकड़बग्घे की चाल कामयाब हो गई। चिड़िया उड़ते हुए आसमान से हिरन के परिवार को देख आई थी। वह परिवार जंगल से बहुत दूर पहुंच गया था।

चिड़िया लकड़बग्घे के पास आई और बोली की हिरन अपने परिवार के साथ शाम तक दूसरे जंगल तक पहुंच जाएगा।

शेर और हिरन की कहानी- Hindi Story For Kids

Hindi Story For Kids – शेर और हिरन की कहानी

अब लकड़बग्घा भाग कर शेर के पास गया और कहा, “जनाब हिरन का परिवार दूसरे जंगल को निकल गया है और शाम तक दूसरे जंगल पहुंच जाएगा।“

शेर लकड़बग्घे से बोला, “अगर मैं शिकार के लिए अभी से दूसरे जंगल को निकलता हूं तो आज रात तक मैं उस जंगल में पहुंच जाऊंगा।“ शेर ने दौड़ लगा दी।

वहीं हिरन का परिवार शाम होते-होते दूसरे जंगल में पहुंच गया। उन्होंने देखा यह जंगल सच में बड़ा सुंदर है। बड़े बड़े बांस के पेड़ हर जगह फैले हुए थे। दूर-दूर तक पेड़ ही पेड़ नजर आ रहे थे।

हिरन के सबसे छोटे बेटे चीनू ने वहां रंग बिरंगी हरे, नीले, पीले ,लाल और बैगनी रंग की तितलियां भी देखी। चीनू को बचपन से छोटी- छोटी और गोल-गोल चीजें बड़ी पसंद थी।

उसने अपने मम्मी पापा से कहा, “देखो-देखो कितना प्यारा जंगल है। चलो और आगे बढ़ते हैं। यहां हमारे रहने के लिए जरूर कोई जगह मिल जाएगी।“

हिरन का परिवार जैसे ही आगे निकला उन्होंने एक छोटे से गोल मटोल से जीव को देखा जो सफेद और काले रंग का था। उन्होंने ऐसा जानवर पहली बार ही देखा था।

उन्होंने रुक कर उसे देखा। वह बहुत मोटा सा था। जो बांस के पेड़ पर चढ़कर गुटर-गुटर कर उसे खा रहा था। चीनू उसे देख कर बड़ा ही खुश हुआ।

Sher aur Hiran Ki Kahaniशेर और हिरण की कहानी

चीनू उसके पास गया और उसने बोला, “हेलो मैं चीनू हूं, तुम्हारा क्या नाम है? तुम तो बड़े प्यारे लगते हो।“ उस जानवर ने कहा, “मेरा नाम पूह है मैं पांडा परिवार से हूं।“

“पांडा परिवार? तुम्हारा परिवार तो बहुत ही सुंदर लगता है,तुम मुझसे दोस्ती कर लो।“ चीनु ने कहा।

पूह ने कहा, ”हम लोग दोस्त नहीं बनाते, पर अगर तुम इस बांस को नीचे गिरा सको तो मैं तुम्हारा पक्का दोस्त बन जाऊंगा।“

चीनू ने अपने मजबूत सींघों से पूह के लिए बांस को नीचे गिरा दिया। पूह बड़ा ही खुश हुआ उसने कहा कि चीनू तुमने मेरे खाने का बड़ा अच्छा इंतजाम कर दिया है। तो चीनू ने उसे कहा, “क्या तुम इन बांस को खाते हो?”

तो पूह ने कहा, “हां मैं तो अभी छोटा हूं तो मैं बस 15 से 16 किलो ही खा पाता हूं, पर मेरे मम्मी पापा रोज 25 किलो बांस खा जाते हैं। तभी तो हम बांस के जंगल में ही रहते हैं।

यहां शेर लकड़बग्घा और खतरनाक जानवर नहीं है। क्योंकि बांस इतने बड़े और घने होते हैं कि शेर उनको पार करने की सोचता ही नहीं। पर हां कोई शेर आना भी चाहे तो उससे हमें कोई नुकसान नहीं है क्योंकि हम खुद शेर को भगा देते हैं।“

Hindi Story For Kids

चीनु ने कहा, “हमें तो शेर के डर से ही उस जंगल को छोड़कर यहां आना पड़ा।“ पूह ने प्यार से कहा, “अरे तुम चिंता मत करो, अब तो तुम मेरे दोस्त हो। मैं और मेरा परिवार तुम्हारी हिफाजत करेंगे।“

अगले दिन शेर पीछा करते हुए इस जंगल में पहुँच गया। शेर पिछली रात से ही हिरन परिवार की खोज में था। उसे बदला जो लेना था। शेर को एक पांडा मिला । शेर उससे पूछा, “तुमने हिरन परिवार को देखा क्या?” तो उस पांडा ने कहा की उसने किसी हिरन को नहीं देखा है।

वह पांडा पूह ही था। फिर पूह ने जा कर चीनू के परिवार को बताया की शेर उनको ढूंड्ते हुये यहा तक पहुच गया है। चीनु के पापा ने पुह को शेर के बदले के बारे मे बताया। पुह ने उन्हें घने बांस में छुप जाने को कहा।

शेर और हिरन की दोस्ती

पूह फिर शेर के पास गया उसने शेर से कहा कि तुम हिरन परिवार को क्यों ढूंढ रहे हो। तब शेर ने कहा की मैं अपना बदला लेना चाहता हूं। हिरन के बेटे ने मेरे बेटे की आंख फोड़ डाली थी।

पूह ने शेर को समझाया कि देखिए बदला लेना कोई अच्छी बात नहीं है। हिरन का परिवार आपका कैसे कुछ बिगाड़ सकता है। आप तो बड़े ही ताकतवर जान पड़ते हो।

अगर हिरन का परिवार आपके जंगल से चले गया है तो यह आपके लिए बड़ा खुशी का मौका है क्योंकि आपके बेटे को अब उन्हें देखकर गुस्सा नहीं आएगा और आप तो जानते हैं कि हमें अच्छी आदतें डालनी चाहिए, दूसरों को माफ कर देना चाहिए।

आप हमारे जंगल से ऐसी दवाई ले जाइए जिससे आपके बेटे की आंख पूरी तरह ठीक हो जाएगी।

शेर ने कहा, “क्या ऐसी कोई दवाई होगी तुम्हारे पास?” पूह ने कहा, “हां है ना मैं अभी लेकर आता हूं।“

बच्चो के लिए हिन्दी कहानी

पूह एक पोटली ले आया उसने कहा, “इस पोटली में जो हरे रंग की पत्तियां होंगी उनको पीसकर उसका रस अपने बेटे की आंख में डालना और 3 दिन बाद आपके बेटे की आंखों की रोशनी वापस आ जाएगी। अपने बेटे से कहना कि यह दवा हिरन ने ही दी है।“

यह बात सुनकर शेर चौंक गया और बोला, “हिरन भला मेरे बेटे के लिए दवाई क्यों देगा? चीनु ने ही तो मेरे बेटे की आँख फोड़ी थी।“

पुह ने बताया की चीनु का परिवार अपनी गलती के लिए शर्मिंदा है। उन्होंने जानबुझ के आपके बेटे की आँख नहीं फोड़ी थी। वो तो चाहते हैं की आपके बेटे कि आँख जल्दी ठीक हो जाए इसलिए उन्होने ये दवाई भिजवाई है।

ये बात सुनकर शेर रो पड़ा और बोला, “चीनू की तो कोई गलती भी नहीं थी। मेरा बेटा ही उनको परेशान कर रहा था वह ही पेड़ से चीनू पर कूदा और चीनू का सींघ उसकी आंख में जा घुसा।“

पूह ने कहा, “मैं ये सब जानता हूं।“ तब शेर बोला, “क्या चीनू और उसका परिवार यहीं पर है।“ पूह ने कहा, “हाँ यहीं पर हैं।“ शेर ने रोते हुए कहा की जो भी मैंने उनके साथ किया में उसके लिए माफी मांगना चाहता हूं।“

Hindi Story For Kids

चीनू शेर और पूह की बातें पेड़ के पीछे छुपकर सुन रहा था। चीनू सामने आया शेर ने उससे माफी मांगी और अपने जंगल चला गया। वहां पहुंचकर वह दवाई उसने अपने छोटे बेटे की आंखों में लगातार तीन दिन तक डाली।

जैसे ही चौथे दिन की सुबह हुई तो उसके बेटे की आंख ठीक हो गई। शेर ने अपने बेटे को सब बातें बता दी। फिर शेर के बेटे ने शेर से कहा, “मैं भी आपके साथ ही हिरन के परिवार और पांडा के परिवार से मिलने जाओंगा।”

फिर शेर अपने बेटे को अपने साथ दूसरे जंगल ले गया। शेर पूह और पांडा से मिला और कहा कि हम अब तुम्हारे साथ खेलने हर महीने इस जंगल में आएंगे और शेर का बेटा जिसका नाम शेरू था उसके दो दोस्त पूह और चीनू बन गए।

Sher aur Hiran Ki Kahani से हमने क्या सीखा:

Sher aur Hiran Ki Kahani से हमें यह सीख मिलती है कि हमेसा दूसरों का भला करना चाहिए। भलाई से ही हम दूसरों का दिल जीत सकते हैं।  

बच्चो के लिए मनोरंजक हिन्दी कहानियांक्लिक करें