Motivation Poems in Hindi-Haar mat mano

Motivational Poems in Hindi | प्रेंरादायक हिन्दी कविता | shayari और insta status के लिए क्लिक करें – Shayari

Motivational Poem in Hindi | प्रेंरादायक हिन्दी कविता |

हम तो हम हैं

इस बात में कितना दम है

एक बार अपने को पहचान कर तो देखो

अन्दर छुपे शेर को निकालकर तो देखो

आप भी कहोगे , हम तो हम हैं

इस बात में कितना दम है |

अपने को कम और दुनिया को ज्यादा जानते हो

दुनिया को अपनी नज़र से

अपने को दुनिया की नज़र से पहचानते हो

एक बार खुद को , खुद की नज़रों से देख कर तो देखो

खुद भी कहोगे , हम तो हम हैं इस बात में कितना दम है |

प्रेंरादायक हिन्दी कविता | पीछे हटना नही

मुश्किल से कभी दोस्तों डरना नही |

लाख तूफान हों पीछे हटना नही |

दर्द साइन का तो है ज्यादा तेरा |

खुशियाँ होंगी सदा ये है वादा मेरा |

हिम्मतो से ए दोस्त आगे बढ़ते चलो |

मुश्किलों के in पहाड़ पे चढ़ते चलो |

मन में विश्वास और कुछ भी करना नही |

लाख तूफान हो पीछे हटना नही |

कुछ की ममता को बदल उड़ा ले गया |

कुछ का सिंदूर सावन बहा ले गया |

आँख तो फिर भी नाम रहेगी सदा उनकी यहाँ |

फिर भी तनहा अपने को समझना नही |

लाख तूफान हो पीछे हटना नही |

ज्योत से ज्योत दिल की जलाते रहो |

प्रेम दुसरे पर लुटाते रहो |

कंधो पे बोझ लाख हो गिरना नही |

लाख तूफान हो पीछे हटना नही |

Motivational Poems in Hindi | प्रेरक कवितायें

प्रेंरादायक हिन्दी कविता |
Motivational POEM

लक्ष्य नही जिनके जीवन का

वो ऐसे ही रह जाते हैं

जेसे लाखो हजारो पत्ते , दरिया में बह जाते हैं

सफलता उन्ही को मिलती है

जिनके सपनो में जान होती है

पंख से कुछ नही होता

होंसले से उड़ान होती है

कोन पुहंचा है अपनी आखरी मंजिल तक

हर किसी के लिए थोडा आसमान बाकी है

ये तुझको लगता है तू उड़ान के काबिल नही

जज़्बा कहता है तेरे पंखो में उड़ान बाकी है

निराशो में आस पैदा करता है

दिलो में विश्वास पैदा करता है

मिटटी की तो बात अलग है

ईश्वर तो पत्थरों में कोमल घांस पैदा करता है |

Motivational Poem in Hindi | प्रेंरादायक हिन्दी कविता |

Motivational Poem Hindi
Motivational Poem Hindi

जो करना था वो नही किया

क्योँ कर्म से कतराते हो

खुद दूर खड़े हो मंजिल से

और मंजिल दूर बताते हो

जब चले वक़्त के साथ नही

फिर पीछे क्योँ पछताते हो

बीत रहे हो खुद ही तुम

और बीता वक़्त बताते हो |

तुम न दे पाए पहचान कोई

तुम मस्त रहे हो अपने में

भोगो ने तुमको भोग लिया

तुमने भोग क्योँ बतलाते हो |

इसलिए उठो और उठ कर चल दो

उठकर ही कुछ कर पाओगे

पहुँचोगे जल्दी मंजिल पर

और मंजिल दूर न पाओगे |

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